यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 09, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
NIT श्रीनगर: जेकेएलएफ ने किया 12 अप्रैल को कश्मीर बंद का एलान
जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के चेयरमैन मुहम्मद यासीन मलिक ने देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरी छात्रों से मारपीट की ...और पढ़ें

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के चेयरमैन मुहम्मद यासीन मलिक ने देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरी छात्रों से मारपीट की घटनाओं के विरोध में 12 अप्रैल को कश्मीर बंद का आह्वान किया है।
इसके अलावा 11 अप्रैल को लाल चौक में धरना-प्रदर्शन होगा। उन्होंने एनआइटी प्रकरण को भाजपा, आरएसएस और शिवेसना की मिलीभगत करार दिया। एनआइटी को कश्मीर से बाहर ले जाने की साजिश है। इस बीच, ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने 12 अप्रैल को कश्मीर बंद का समर्थन करते हुए लोगों से मेवाड़ राजस्थान में कश्मीरी छात्रों के साथ हुई मारपीट के खिलाफ सोमवार 11 अप्रैल को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का आह्वान किया है।
यासीन मलिक ने कहा कि मीडिया कश्मीरियों को खलनायक बना रहा है और इसे सांप्रदायिक रंग दे रहा है। राजनीतिक दल भी इस मामले में सियासत कर रहे हैं। आज पूरा देश, सियासी दल और केंद्र सरकार एनआइटी में क्रिकेट मैच को लेकर दो गुटों में हुए विवाद में हस्ताक्षेप कर रही हैं। ये लोग उस समय कहां गायब हो जाते हैं जब देशभर में पढऩे गए कश्मीरी छात्रों को पीटा जाता है। कुछ दिन पहले नोएडा व गुडगांव में कश्मीरी लड़कों से मारपीट की गई।
चंडीगढ़ और मोहाली में भी कई बार कश्मीरी छात्रों को पीटा गया। कुछ दिन पहले मेवाड़ राजस्थान में कश्मीर के सात छात्रों को मीट खाने पर पीटा गया, उन्हें जेल में बंद किया गया। बाद में कॉलेज से निकाल दिया गया। उनके लिए कोई आवाज क्यों नहीं उठी। कश्मीरियों ने कभी भी यहां आने वाले सैलानियों, छात्रों को नुक्सान नहीं पहुंचाया है। मलिक ने तिरंगा लहराए जाने और भारत माता की जय के नारों का जिक्र करते हुए कहा कि सभी जानते हैं कि आम कश्मीरी की भावनाएं किस तरफ हैं।
