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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 27, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राजपथ से एडिलेड तक जय हो, आम लोगों से मिले पीएम

By Bhupendra SinghEdited By:
Published: Wed, 27 Jan 2016 06:20 AM (IST)Updated: Wed, 27 Jan 2016 09:52 AM (IST)

मंगलवार सुबह हल्की धूप और ठंडी हवाओं के बीच राजपथ पर जनसैलाब उमड़ा हुआ था। गणतंत्र दिवस समारोह देखने आए ...और पढ़ें

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मुकेश केजरीवाल, नई दिल्ली। मंगलवार सुबह हल्की धूप और ठंडी हवाओं के बीच राजपथ पर जनसैलाब उमड़ा हुआ था। गणतंत्र दिवस समारोह देखने आए लोगों के मन में देशभक्ति का जज्बा हिलोरें ले रहा था। 10 बजने से कुछ पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, मुख्य अतिथि फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सलामी मंच पर पहुंचे। उस समय तक पूरा राजपथ उत्साही देशवासियों और विदेशी मेहमानों से भर चुका था।

PICS: गणतंत्र दिवसः राज्यों की झांकियों में दिखी विविधता में एकता की झलक

राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देने के बाद देश की प्रगति और सांस्कृतिक विविधता की झलक झांकियों के रूप में राजपथ पर उतरने लगी। स्वदेश में विकसित पहली वायु रक्षा प्रणाली 'आकाश' और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' आधुनिक सैन्य शक्ति का अहसास करवा रहे थे, तो विभिन्न झांकियों में देश की समृद्ध संस्कृति का प्रदर्शन किया गया।

Pics: झांकियों के जरिए दिखी राजपथ पर मंत्रालयों और विभिन्न विभागों की झलक

सर्वोच्च सेनापति प्रणब मुखर्जी ने परेड की सलामी ली। इस बार फ्रांसीसी सेना को गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने वाली पहली विदेशी सेना होने का गौरव हासिल हुआ। सबसे आगे मार्च कर रहे फ्रांसीसी सेना के जवान और उनके बैंड विशेष आकर्षण रहे।

ओलांद को समझाते रहे मोदी

फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद सांस्कृतिक झांकियों को टकटकी लगाकर देखते रहे। कुछ मौकों पर मोदी ने झांकियों के बारे में विस्तार से बताकर उनका कौतूहल भी शांत किया। एशियाई शेरों को दिखाती गुजरात राज्य की झांकी के बारे में तो मोदी देर तक उन्हें बताते दिखे। यह पांचवां मौका है, जब कोई फ्रांसीसी शासन प्रमुख गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य अतिथि बना है। इससे पहले 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जैक शिराक, 1980 में राष्ट्रपति वेलेरी जिस्काड एस्तेंग, 1998 में राष्ट्रपति जैक शिराक और 2008 में राष्ट्रपति निकोलाई सरकोजी मुख्य अतिथि बने थे।

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आम लोगों से मिले पीएम

केसरिया साफे और बादामी बंद गला सूट में पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी इस मौके पर भी जनता से सीधे जुड़ते हुए देखे गए। परेड की औपचारिकता समाप्त होते ही प्रधानमंत्री जनता की ओर बढ़ गए। सड़क की दूसरी तरफ जाकर भी आम लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। फिर देर तक लोगों की ओर हाथ हिलाते हुए पैदल आगे बढ़ते रहे।

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26 साल बाद श्वान दस्ता

इस बार सबकी निगाहें खासतौर पर सेना के रिमाउंट वेटनरी कोर के श्वान दस्ते पर थी। इसे 26 साल बाद दोबारा परेड में शामिल किया गया है। सीमा सुरक्षा बल के ऊंट सवार दस्ते ने न सिर्फ मार्च किया, बल्कि बैंड वादन कर भी लोगों को आश्चर्य से भर दिया। सेना के मोटरसाइकिल सवार जवानों ने अपने करतब दिखाकर लोगों को दांतों तले अंगुली दबा लेने के लिए मजबूर कर दिया।

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स्वदेशी की ताकत

डीआरडीओ ने कम दूरी के वायु और समुद्री निगरानी रडार के साथ ही पनडुब्बी रोधी युद्धपोत टोरपीडो के रूप में रक्षा तकनीक में भारत के बढ़ते दखल का उदाहरण पेश किया। हालांकि यह पहला मौका था जब पूर्व फौजियों के दस्ते ने मार्च नहीं किया। मगर उसकी जगह पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए किए जा रहे कामों पर आधारित एक झांकी जरूर देखने को मिली।

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आसमान में जलवा

--वायुसेना के जांबाजों ने जब हैरतअंगेज कारनामे दिखाने शुरू किए तो लोगों की नजर एक पल के लिए भी आसमान से हट नहीं सकी।

--परेड की शुरुआत में चार एमआइ 17 वी5 हेलीकाप्टरों ने सबसे पहला फॉरमेशन बनाया।

--इनमें सबसे आगे उड़ रहे हेलीकाप्टर ने तिरंगा लहराया, तो बाकी ने नीचे बैठे लोगों पर फूलों की पंखुडि़यां बरसाई।

--780 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पांच जगुआर पल भर में ही एक साथ उड़ते हुए गुजर गए।

--एसयू 30 एमकेआइ विमानों ने त्रिशूल का आकार बनाया तो सी-17 ग्लोबमास्टर और एसयू-30 ने एक साथ ग्लोब का फॉरमेशन बनाकर लोगों को लुभाया।

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