विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ओणम : दक्षिण भारत के इस त्योहार को कितना जानते हैं आप?

By Digpal SinghEdited By:
Published: Mon, 04 Sep 2017 03:32 PM (IST)Updated: Mon, 04 Sep 2017 06:57 PM (IST)

दक्षिण भारत का इतना बड़ा त्योहार होने के बावजूद उत्तर भारत में ओणम के बारे में लोग बहुत कुछ नहीं जानते हैं। आइए जाने ओणम के बारे में...

ओणम : दक्षिण भारत के इस त्योहार को कितना जानते हैं आप?
ओणम : दक्षिण भारत के इस त्योहार को कितना जानते हैं आप?

नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। ओणम दक्षिण भारत का और खासकर केरल का प्रसिद्ध त्योहार है। केरल में यह त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। असल में यह फसली त्योहार है और सभी लोग इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। लेकिन दक्षिण भारत का इतना बड़ा त्योहार होने के बावजूद उत्तर भारत में इस त्योहार के बारे में लोग बहुत कुछ नहीं जानते हैं। आइए जानें ओणम के बारे में...

 

क्यों मनाया जाता है ओणम

ओणम हर साल चिंगम महीने की शुरुआत में मनाया जाता है। दरअसल यह मलयालम कैलेंडर (कोल्लावर्षण) का पहला महीना है। एक पौराणिक कथा के अनुसार यहां के राजा महाबली अपनी प्रजा की देख-रेख के लिए साल में एक बार धरती पर आते हैं और इस मौके पर ही ओणम का त्योहार मनाया जाता है।

 

क्या है महाबली की कहानी

कहा जाता है कि यहां एक असुर राजा 'महाबली' राज करता था। राजा महाबली के राज में जनता काफी खुश और खुशहाल थी। सभी लोग महाबली को बहुत मानते थे। अपनी तमाम अच्छाईयों के बीच महाबली की एक कमी थी और वह यह कि राजा अभिमानी था। महाबली के स्वभाव की इसी कमी की वजह से देवताओं ने उसके शासन को खत्म करने की ठानी। इसके पीछे एक कारण महाबली की बढ़ती लोकप्रियता को भी माना जाता है। देवताओं ने उसका राज खत्म कर उसे पाताल लोक भेज दिया। हालांकि राजा महाबली की अच्छाईयों को देखते हुए उसे साल में एक बार अपनी जनता के पास आने की इजाजत दे दी गई। कहा जाता है कि साल में एक बार जब महाबली अपनी जनता से मिलने आते हैं तब ओणम का त्योहार मनाया जाता है।

 

यह भी पढ़ें: सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की बदरंग तस्वीर पेश करता है यह वाकया

 

10 दिन का त्योहार

असल में ओणम सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं बल्कि 10 दिन का पूरा कार्निवल है। इसके पहले दिन को अथम और दसवें व अंतिम दिन को थिरुओणम कहते हैं। ओणम में केरल की सांस्कृतिक झलक दिखती है और यह खासा मशहूर भी है। ओणम में तरह-तरह के व्यंजन, पारंपरिक गीत-संगीत, खूबसूरत डांस, ऊर्जा से परिपूर्ण गेम्स, फूल, सुसज्जित हाथी और नावों का भव्य नजारा देखने को मिलता है।

 

यह है खास

 

ओणम के त्योहार में सबसे खास चीज होती है इसकी खास दावत, जिसे ओणासद्या कहा जाता है और इसे थिरुओणम यानी इस पूरे कार्निवल के अंतिम दिन आयोजित किया जाता है। इसमें 11 से 13 महत्वपूर्ण पकवान होते हैं। इस दावत की खास बात यह भी है कि इसे केले के पत्तों पर परोसा जाता है और लोग जमीन पर बैठकर इस दावत का लुत्फ उठाते हैं।

 

ओणम का स्वरूप हुआ अंतरराष्ट्रीय

भारत सरकार ने भी ओणम के सास्कृतिक महत्व को समझा है और इसे दुनियाभर में प्रचारित किया है। इस दौरान सरकार खासतौर पर ओणम सप्ताह का आयोजन करती है। सरकारी पहल कामयाब रही और ओणम के दौरान देश से ही नहीं दुनियाभर से लोग इस खास पर्व का हिस्सा बनने के लिए केरल पहुंचते हैं।

 

यह भी पढ़ें: इस बम का एक धमाका कर सकता है कई शहरों को खत्म!