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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 20, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चीन मुद्दे पर दुनिया हमारे साथ, बातचीत से चाहते हैं सीमा विवाद हल

By Pratibha Kumari Edited By:
Published: Thu, 20 Jul 2017 01:20 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jul 2017 06:52 AM (IST)

विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने कहा है कि चीन डोकलाम ट्राइ-जंक्‍शन इलाके में स्थिति बदलने की कोशिश कर रहा है। मगर घबराने की बिल्‍कुल जरूरत नहीं है।

चीन मुद्दे पर दुनिया हमारे साथ, बातचीत से चाहते हैं सीमा विवाद हल
चीन मुद्दे पर दुनिया हमारे साथ, बातचीत से चाहते हैं सीमा विवाद हल

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। चीन के बढ़ते तीखे तेवर को लेकर भारत ने भी अपनी कूटनीतिक लामबंदी बढ़ा दी है। सिक्किम-भूटान सीमा पर चार वर्ष पहले भारत के साथ किये समझौते का उल्लंघन करने के बाद चीन जिस तरह से आक्रामक तेवर अपनाये है उसे लेकर दुनिया के कई देशों ने चिंता जताई है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर, ब्रिटेन जैसे देशों ने इस पूरे मामले पर भारत की तरफ से दिखाई गई परिपक्वता की तारीफ भी की है। वैसे इस कूटनीतिक दावपेंच के बावजूद भारत ने चीन को इशारों में यह भी समझा दिया कि वह हर तरह की चुनौती से निपटने को तैयार हैं। भारत ने यह भी चीन को बता दिया कि मौजूदा तनाव दूर करने के लिए दोनों देशों को कदम उठाने होंगे।

भारत और चीन के बीच जारी विवाद के डेढ़ महीने के बाद गुरुवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस पर पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान एक पूरक सवाल के उत्तर में कहा कि भारत चीन के साथ सीमा विवाद का हल बातचीत के जरिये करना चाहता है। लेकिन इसके लिए पहले दोनों देशों को डोकलाम से अपनी सेनाओं को पीछे लेना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने चीन के साथ जारी विवाद पर कई देशों को बताया है और इन देशों ने माना है कि भारत का पक्ष सही है। वे इस बात को समझ रहे हैं कि कानून भारत के साथ है। बाद में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने भी कूटनीतिक स्तर पर दूसरे देशों के साथ की जा रही बातचीत का हवाला दिया लेकिन उन्होंने ब्योरा देने से मना किया। बताते चलें कि पिछले दिनों चीन ने भी बीजिंग में दूसरे देशों के दूतावासों के प्रतिनिधियों से मिल कर अपनी बात काफी आक्रामक तरीके से रखी थी।

सुषमा स्वराज ने कहा कि चीन ने मनमाने तरीके से सिक्किम-भूटान सीमा (डोकलाम) को लेकर जारी विवाद पर स्थिति में बदलाव की कोशिश की है। लेकिन चीन की तरफ से यह कोशिश भारत की सुरक्षा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसके साथ स्वराज ने मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति को खत्म करने के लिए अपना फार्मूला भी पेश कर दिया है। इसके मुताबिक दोनों देशों को अपनी-अपनी सेना को पीछे लाना पड़ेगा। यानी भारत चीन की इस मांग को स्वीकार नहीं करेगा कि पहले वह (भारत) अपनी सेना को वापस बुलाये और उसके बाद शांति वार्ता हो।

स्वराज ने कहा कि भारत, भूटान और चीन में 2012 में एक समझौता हुआ जिसमें किसी भी समस्या का आपसी बातचीत से समाधान करने की बात है। लेकिन चीन की तरफ से यथास्थिति को बदलने की कोशिश की जा रही है। उसकी तरफ से पहले भी सड़क निर्माण किया जाता रहा है लेकिन इस बार बड़े-बड़े ट्रक व बुलडोजर भेजे गये हैं। स्वराज ने कहा, 'भारत का साफ तौर पर मानना है कि इस मामले का समाधान निकल सकता है। लेकिन दोनों देशों को अपनी सेनाओं को वापस बुलाना होगा।' सनद रहे कि चीन डोकलाम क्षेत्र में अपनी सेना भेजने के बाद यह कह रहा है कि अब जब तक भारत अपनी सेना वापस नहीं बुलाएगा तब तक हालात को सामान्य बनाने की बात नहीं होगी।

चीन की तरफ से सिर्फ डोकलाम में ही नहीं बल्कि भारत के चारों तरफ समुद्री क्षेत्र में भी जिस तरह से ताकत बढ़ाई जा रही है उस पर राज्य सभा में चिंता जताई गई। चीन की तरफ से पाकिस्तान, श्रीलंका समेत अन्य देशों में नौ सैनिक अड़्डे बनाने या दक्षिण चीन सागर में अडि़यल रवैया अपनाने को लेकर स्वराज ने कहा कि भारत चीन को लेकर सतर्क है। हालांकि यह कहना गलत होगा कि भारत को घेरा जा रहा है। दक्षिण चीन सागर को लेकर भारत का अपना स्टैंड साफ है कि यहां अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक फैसला होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत व चीन के बीच पंचशील सिद्धांत अभी भी मौजूं है।

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