यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 22, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
भारत को संकट से मुक्ति का इकलौता रास्ता हिंदुत्व
पटना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डा. मोहन मधुकर भागवत ने कहा कि भारत को संकट से छुटकारा दिलाने ...और पढ़ें

पटना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डा. मोहन मधुकर भागवत ने कहा कि भारत को संकट से छुटकारा दिलाने का एकमात्र रास्ता हिंदुत्व है, जिसका मूल आधार सबका सम्मान व सबका कल्याण है। अपने विविधतापूर्ण व विशाल देश का काम एक नायक से नहीं चलने वाला है। स्थानीय स्तर पर नायकत्व विकसित करना होगा। वे गुरू पूर्णिमा के अवसर पर स्थानीय श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में रविवार को आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उनके अनुसार देश में बहुत कुछ अच्छा हुआ है लेकिन बीते दो-तीन वर्षो में स्थितियां निराशाजनक हुई हैं। जनमानस हताश है। देश को आगे ले जाने की जिम्मेदारी निभाने में जो असफल है, उन्हें हटा दिया जाना चाहिए।
डा.भागवत ने कहा कि देश को समृद्ध बनाने के लिए समाज में गुणवत्ता व एकता जरूरी है। उन्होंने रवींद्र नाथ टैगोर के लेख स्वदेशी समाज का जिक्र करते हुए कहा कि परिवर्तन का आरंभ राजनीति से नहीं समाज से होता है। मात्र सत्ता बदल जाने से कुछ नहीं होता। भागवत ने कहा कि अपना देश इतना बड़ा और विविधता पूर्ण है कि यहां एक नायक से काम नहीं चलने वाला। यहां स्थानीय स्तर पर नायकत्व विकसित होना चाहिए। अच्छी राह चलना आसान नहीं। संघ का एक मात्र काम विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छी राह चलने वाले स्वयंसेवकों का निर्माण करना है।
उन्होंने कहा कि अपनी दुर्दशा के लिए हमारी कमियां ही जिम्मेदार हैं। देश की विविधता का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि बाहर से आने वालों को लगता है कि यहां कई देश एक साथ हैं। उनके मानस में हमारी संस्कृति की अवधारणा ही नहीं है, जबकि हमारी विविधता में ही एकता के सूत्र हैं। हमारी धरती हमारी आवश्यकता पूरी कर हमें अपने अपने तरीके से जीने का अवसर देती है। यही वजह है कि हम तमाम देवी देवताओं, विविध विश्वास और पूजा पद्धतियों के साथ सहिष्णुता से रह रहे हैं। यही भारत की मिट्टी की विशिष्टता है। हिन्दू संस्कृति भी यही है।
डा.भागवत ने कहा कि विभिन्न देशों की भौगोलिक स्थितियां भिन्न-भिन्न होती हैं। अरब देशों की धरती वहां कुछ नहीं देती। भारत की धरती यहां निवासियों को सबकुछ देती है। पारसी और हिब्रू को छोड़ कर भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज एक ही थे। यह बात विज्ञान से भी सिद्ध हो गयी है। हमारी अपनी अपनी पहचान एक बड़ी पहचान का हिस्सा बनायी जा सकती है। हमें हिंदुत्व के इसी आधार पर समाज को एक करना है। संघ के विषय तमाम तरह की बातें लोगों के मन में है। संघ को समझने के लिए लोगों को चाहिए कि वे संघ में आएं। एक दो साल रहें। फिर अपने अनुभव के आधार पर कोई निर्णय लें। संघ को समझने के लिए संघ की प्रतिस्थापना को समझना जरूरी है।
अंग्रेजों ने सोचा था कि हिंदू- मुसलमान लड़ते-लड़ते खत्म हो जाएंगे। यह सोच गलत थी। दोनों लड़ते-लड़ते साथ रहने का रास्ता निकाल लेंगे और यह रास्ता हिन्दुत्व का रास्ता होगा। हिन्दुत्व ही हिन्दुस्तान और यहां रहने वालों की पहचान है। यह केवल देह पोषण की राह नहीं है। यह स्थानीय परिस्थितियों में विकसित विचार है।''
डॉ. मोहन मधुकर भागवत
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