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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 17, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जानें- आखिर क्‍या है मानव विकास सूचकांक, कहा ठहरता है इसमें भारत और पाकिस्‍तान

By Kamal VermaEdited By:
Published: Tue, 17 Dec 2019 10:55 AM (IST)

मानव विकास सूचकांक पर पूरी दुनिया के देशों की साख टिकी होती है। देशों का विकास भी इस पर ही लागू होता है।

जानें- आखिर क्‍या है मानव विकास सूचकांक, कहा ठहरता है इसमें भारत और पाकिस्‍तान
जानें- आखिर क्‍या है मानव विकास सूचकांक, कहा ठहरता है इसमें भारत और पाकिस्‍तान

नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। दुनिया में जितने भी देश हैं उनका विकास और वहां पर हुआ मानव विकास उस देश की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। जहां तक मानव 'विकास सूचकांक (Human Development INdex/HDI) की बात है तो आपको बता दें कि इस सूचकांक का उपयोग देशों को मानव विकास के आधार पर आंकने के लिए किया जाता है। इस सूचकांक से इस बात का पता चलता है कि कोई देश विकसित, विकासशील या गरीब है। मानव विकास सूचकांक जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और वहां की प्रति व्यक्ति आय संकेतकों का एक समग्र आंकड़ा है। 

जिस देश की जीडीपी प्रति व्‍यक्ति, जीवन प्रत्याशा और शिक्षा का स्तर अधिक होता है तो उसको इस सूचकांक की उच्च श्रेणी में रखा जाता है। प्राप्त होती हैं। मानव विकास सूचकांक का विकास पाकिस्तान के अर्थशास्त्री महबूब उल हक द्वारा 1990 में किया गया था। इसके पीछे उन के दो उद्देश्य थे। इसमें इकॉनोमिक्‍स का सेंटर प्‍वाइंट, राष्ट्रीय आय लेखा से मानव-केन्द्रित नीतियों पर उन्‍हें ट्रांसफर करना था।इसके लिए उन्‍होंने जिन लोगों की टीम तैयार की थी उसमें गुस्ताव रानीस, कीथ ग्रिफिन, पॉल स्ट्रीटन, फ्रैन्सस स्टीवर्ट, सुधीर आनंद और मेघनाद देसाई जैसे बड़े अर्थशास्‍त्री शामिल थे। 

भारत का इस सूचकांक में स्‍थान 

आपको यहां पर बता दें कि इस सूचकांक में 189 देशों को अलग-अलग आधार पर रैंकिंग दी जाती है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के मुताबिक वर्ष 2019 में मानव विकास सूचकांक के मामले में भारत 129वें स्‍‍‍‍‍‍थान पर है। वर्ष 2018 में भारत इस सूचकांक में 130वें स्‍थान पर था। इस लिहाज से भारत ने इस सूचकांक में एक पायदान की छलांग लगाई है। इसकी वजह भारत द्वारा लगातार विकास की राह पर अग्रसर होना है। यूएनडीपी में भारतीय प्रतिनिधि ने जो तर्क दिया उसके मुताबिक भारत ने वर्ष 2005-2016 के दौरान काफी तरक्‍की की है। इस दौरान जो काम किए गए उसकी वजह से न सिर्फ लोगों का जीवन सुधरा बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधरी। इस दौरान करीब 27.1 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर हो गए। इसके अलावा भारत की आबादी में जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर होने की वजह से भी रैंकिंग में सुधार हुआ है

पाकिस्‍तान पीछे

हालांकि आपको बता दें कि इस सूचकांक में भारत से आगे जो देश हैं उनमें श्रीलंका, ईरान और चीन शामिल है। लेकिन पाकिस्‍तान इस सूचकांक में भारत से कहीं पीछे है। वह इस सूचकांक में 147वीं पायदान पर है। वहीं बांग्लादेश की 134वें पायदान पर है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि यूएनडीपी की रिपोर्ट के मुताबिक 1990-2018 के दौरान दुनिया के किसी भी क्षेत्र के मुकाबले सबसे अधिक , वहीं पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में यह 43 फीसद रही। 

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