यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 14, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जानबूझकर बैंकों का कर्ज न चुकाने वालों पर होगी सख्ती: जयंत सिन्हा
उद्योगपति विजय माल्या की तरह बैंकों से भारी भरकम कर्ज लेकर जानबूझ कर न चुकाने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली ...और पढ़ें

नई दिल्ली। उद्योगपति विजय माल्या की तरह बैंकों से भारी भरकम कर्ज लेकर जानबूझ कर न चुकाने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सरकार ने साफ कहा है कि ऐसे लोगों को न्याय के कठघरे में खड़ा करने के लिए कानून पूरी सख्ती से काम कर रहा है। हालांकि वैश्विक मंदी से प्रभावित उद्योगों की समस्याओं से सरकार वाकिफ है और उनके समाधान के लिए कई नीतिगत उपाय भी किए हैं।
वित्त राय मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि बैंकों के फंसे कर्ज के संबंध में हमें यह समझना चाहिए कि एक श्रेणी में ऐसे लोग हैं जो जानबूझकर बैंक का कर्ज नहीं चुका रहे हैं। दूसरी श्रेणी में ऐसे लोग हैं जिनका कारोबार वैश्विक मंदी या किसी अन्य वजह से प्रभावित हो गया है। सिन्हा ने कहा कि जो लोग जानबूझकर बैंकांे से कर्ज लेकर नहीं चुका रहे हैं, उनके विरुद्ध कानून पूरी सख्ती से काम कर रहा है। सभी जांच एजेंसियां इस संबंध में काम कर रही हैं।
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दूसरी ओर वैश्विक मंदी और पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की नीतिगत विफलता की इस वजह से कई उद्योगों में फंसे कर्ज की समस्या है। ऐसे उद्योगों को संकट से उबारने के लिए सरकार ने उपयुक्त नीतिगत कदम उठाए हैं, ताकि क्रमबद्ध ढंग से उनकी समस्याओं को सुलझाया जा सके। ऐसे व्यक्तियों ने कोई आपराधिक या गैर कानूनी काम नहीं किया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टीन लगार्ड के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि सरकार ऐसे कदम उठा रही है जिससे कि बैंकों के फंसे कर्ज की समस्या खड़ी न हो। दिवालिएपन पर कानून बनाने को सरकार ने एक विधेयक संसद में पेश किया है।
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वित्त मंत्रलय और आइएमएफ की ओर से आयोजित एडवांसिंग एशिया सम्मेलन के समापन अवसर पर लगार्ड ने कहा कि भारत में बैंकिंग तंत्र में पूंजी ठीक है। साथ ही सरकार बैंकों की मजबूती के लिए कदम भी उठा रही है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा ‘आधार’ नंबर के व्यापक इस्तेमाल को दूसरे देशों के लिए सीख करार दिया।
