यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 15, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
प्रवर समिति के हवाले शत्रु संपत्ति विधेयक
लोकसभा से पारित शत्रु संपत्ति विधेयक को राज्यसभा ने प्रवर समिति के सुपुर्द कर दिया है। समिति विधेयक की विस्तृत ...और पढ़ें

नई दिल्ली। लोकसभा से पारित शत्रु संपत्ति विधेयक को राज्यसभा ने प्रवर समिति के सुपुर्द कर दिया है। समिति विधेयक की विस्तृत पड़ताल करेगी। विधेयक का उद्देश्य पाकिस्तान या चीन जा बसे लोगों की संपत्ति को उत्तराधिकार या हस्तांतरण संबंधी दावों से बचाना है।
भाजपा सांसद भूपेंदर यादव की अध्यक्षता में 23 सदस्यीय समिति शत्रु संपत्ति (संशोधन व मान्यकरण) विधेयक, 2016 की समीक्षा करेगी। इस विधेयक को शत्रु संपत्ति कानून, 1968 में बदलाव के लिए तैयार किया गया है। संशोधन विधेयक का उद्देश्य कानून की कुछ कमजोरियों को दुरुस्त करना है, जिससे एक बार सरकार के संरक्षण में ली जा चुकी शत्रु संपत्ति पुन: संबद्ध व्यक्ति या संस्था के हवाले नहीं जा सके।
विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने का यह फैसला विभिन्न समूह के नेताओं की बैठक में लिया गया। ये समूह विधेयक पर विस्तृत चर्चा चाहते हैं। विधेयक को नौ मार्च को लोकसभा से पारित कराया गया था। लोकसभा में सरकार ने विधेयक को संसद की स्थायी समिति के पास भेजने की विपक्ष की मांग खारिज कर दी थी।
गौरतलब है कि 1965 व 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद कई लोग भारत से पाकिस्तान चले गए थे। सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकता ले लेने वाले ऐसे लोगों की संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया था।
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