यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 04, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
चुनाव आयोग का गूगल से करार, विशेषज्ञ चिंतित
भारत निर्वाचन आयोग ने अमेरिका की इंटरनेट कंपनी गूगल के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किया है। इसके तहत आगामी ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने अमेरिका की इंटरनेट कंपनी गूगल के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किया है। इसके तहत आगामी लोकसभा चुनाव से पहले गूगल मतदाताओं के ऑनलाइन पंजीकरण, मैप के जरिये मतदान केंद्र ढूंढ़ने व अन्य सुविधाएं मुहैया कराने में मदद करेगा।
भारतीय इंफोसेक संघ के अंतर्गत साइबर विशेषज्ञों ने इस अनुबंध पर ऐतराज जताते हुए इससे भारतीयों के निजता हनन व व्यक्तिगत जासूसी की आशंका जताई। साइबर विशेषज्ञों के एक दल ने इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर गूगल के साथ अनुबंध रद करने की गुजारिश की। पत्र के मुताबिक, जब भारतीय कंपनियां इस तरह की सुविधाएं प्रदान कर सकती हैं तो फिर अमेरिकी कंपनी से इस तरह का संवेदनशील काम क्यों करवाया जा रहा है।
दिसंबर में हुआ अनुबंधसाइबर एक्सपर्ट जतिन जैन ने बताया कि दिसंबर में अनुबंध को अंतिम रूप दिया गया था। अनुबंध के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन समेत वोटरों से संबंधित जानकारी एकत्र करने व उनका डाटा बेस तैयार करने में गूगल की मदद लेगा। अगले छह माह के दौरान गूगल आयोग को अपने सर्च इंजन समेत सभी संसाधन उपलब्ध कराएगा।
सामाजिक दायित्व कोष से पैसा होगा खर्च जतिन ने बताया कि गूगल ये सुविधाएं आयोग को मुफ्त देगा। इसके लिए वह अपने सामाजिक दायित्व कोष से पैसे खर्च करेगा। उन्होंने बताया कि गूगल जैसी कंपनियों को कानूनन सामाजिक कार्यो के लिए अपने मुनाफे का एक निश्चित प्रतिशत खर्च करना होता है। इसलिए वह 100 देशों में इसी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराता है।
साइबर विशेषज्ञों की आशंकाएंपिछले दिनों यह रहस्योद्घाटन हुआ था कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) अमेरिकी नागरिकों के साथ-साथ दुनिया के अनेक देशों की सरकार, दूतावास व नागरिकों के टेलीफोन, ई-मेल और सोशल मीडिया की गतिविधियों पर नजर रखती है। इसमें भारत का भी नाम शामिल है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि गूगल द्वारा मतदाता पंजीकरण करवाने का मतलब भारतीयों के बारे में जानकारी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों तक पहुंचेगी। इससे किसी व्यक्ति के बारे में जानकारी हासिल कर साइबर क्राइम को अंजाम दिया जा सकेगा। राजनीतिक विज्ञापनों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकती हैं।
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