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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 23, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर: नौहट्टा में भीड़ ने पीट-पीटकर DSP को मौत के घाट उतारा

By Kishor JoshiEdited By:
Published: Fri, 23 Jun 2017 09:26 AM (IST)Updated: Sat, 24 Jun 2017 07:04 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद के बाहर गुस्साई भीड़ ने एक डीएसपी की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

जम्मू-कश्मीर: नौहट्टा में भीड़ ने पीट-पीटकर DSP को मौत के घाट उतारा
जम्मू-कश्मीर: नौहट्टा में भीड़ ने पीट-पीटकर DSP को मौत के घाट उतारा

 श्रीनगर (जेएनएन)। शब ए कद्र की मुबारक रात को जब पूरी दुनिया में मुस्लिम अपने गुनाहों से तौबा करते हुए खुदा की इबादत में डूबे हुए थे,उस समय ग्रीष्मकालीन राजधानी में  स्थित ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में  इबादत के लिए सादे कपड़ों में जा रहे राज्य पुलिस के एक डीएसपी  मोहम्मद अयूब पंडित को शरारती तत्वों ने  मस्जिद के बाहर पीट-पीट कर मार डाला।  डीएसपी ने जान बचाने के लिए गोली भी चलाई, उसे भीड़ से छुड़ाने के लिए वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने लाठियां भी भांजी,लेकिन नाकाम रहे। अलबत्ता,इस दौरान डीएसपी की पिस्तौल से निकली गोलियों से तीन युवक जख्मी हो गए। 

आधी रात के बाद हुई इस घटना में मारे गए डीएसपी की तत्काल पहचान नहीं हो पाई और तढक़े दो बजे तक कोई पुलिस अधिकारी भी उसकी पहचान करने में समर्थ नहीं था। सभी कह रहे थे कि यह किसी खुफिया एजेंसी का गैर मुस्लिम अधिकारी है। 

राज्य पुलिस के डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित को पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंची जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा, 'इससे बड़ा शर्मनाक वाकया कोई हो नहीं सकता।' उन्होंने कहा हमारी पुलिस देश में सबसे अच्छी है लेकिन वे संयम का परिचय इसलिए देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है, अपने ही लोगों को डील कर रहे हैं।

जिस समय डीएसपी को बाहर भीड़ ने मौत के घाट उतारा,उस समय मस्जिद के भीतर उदारवादी हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख मीरवाईज मौलवी उमर फारुक लोगों को इस्लाम का पाठ पढ़ाते हुए अमन, दयानतदारी और भाईचारे की सीख दे रहे थे। 

बताया जाता है बीती रात को शब-ए-कद्र थी। इस मुबारक मौके पर स्थानीय मस्जिदों,खानकाहों और दरगाहों में लोग नमाज- इबादत के लिए जमा हुए थे। शब-ए-कद्र को सामान्य तौर पर इस्लाम के मानने वाले मस्जिदों में ही पूरी रात इबादत में गुजारते हैं। 

श्रीनगर की एतिहासिक जामिया मस्जिद में इस मौके पर एक बहुत बड़ी मजलिस होती है। आधी रात के बाद राज्य पुलिस के एक डीएसपी मोहम्मद अयूब भी इबादत के लिए जामिया मस्जिद में गए। वह सादे कपड़ों में थे। लेकिन मस्जिद के बाहर कुछ शरारती तत्वों ने उन्हें पहचान, पकड़ लिया। उन्होंने डीएसपी की पिटाई शुरु कर दी। एक युवक ने कथित तौर पर उनका पिस्तौल छीन, उन्हीं पर गोली चलाने का प्रयास किया। लेकिन हाथापाई में वह उन्हें गोली नहीं मार पाया और तीन अन्य युवक जो वहां डीएसपी की पिटाई कर रहे थे,गोली लगने से जख्मी हो गए। इनकी पहचान दानिश मीर, मुदस्सर अहमद और सज्जाद अहमद बट के रुप में हुई है। तीनों को उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया है। 

इस बीच,गोली चलने की आवाज से वहां अफरा-तफरी मच गई। जामिया से कुछ दूरी पर तैनात पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ के जवान गोली की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां एक व्यक्ति को पिटते देख,उसे बचाने के लिए लाठियां और आंसूगैस शरारती तत्वों पर इस्तेमाल की। लेकिन जब तक वह हिंसक भीड़ को खदेड़ते,भीड़ की मार से डीएसपी की मौत हो चुकी थी। इसके साथ ही वहां हिंसक भीड़ और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पें शुरु हो गई। 

हालात को काबू करने के लिए पुलिस को लाठियां, आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। आंसू गैस के कारण जामिया मस्जिद के भीतर  मौजूद श्रद्धालुओं को भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दिंवगत डीएसपी की पहचान को लेकर काफी देर तक संशय बना रहा। नौहट्टा पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी, संंबधित डीएसपी और एसपी समेत कोई भी पुलिसकर्मी या अधिकारी उसकी पहचान करने में समर्थ नहीं हो पाया। सभी दावा करने लगे कि दिवंगत किसी केंद्रीय खुफिया एजेंसी का अधिकारी है।

बाद में जब दिवंगत के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया तो पता चला कि मरने वाला कोई गैर मुस्लिम नहीं बल्कि राज्य पुलिस के सुरक्षा विंग में तैनात डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित है। दिवंगत जामिया मस्जिद के साथ सटे खानयार का रहने वाला था।  सुबह आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उसका शव उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने भी इस सिलसिले में एक मामला दर्ज कर छानबीन शुरु कर दी है। दिवंगत पुलिस अधिकारी की पिस्तौल की भी तलाश की जा रही है। 

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