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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 21, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

विजय गोयल पर लटक रही तलवार

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Published: Mon, 21 Oct 2013 03:50 AM (IST)Updated: Mon, 21 Oct 2013 08:45 AM (IST)

दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगातार चौथी हार से बचने के लिए भाजपा ने अपना 'चेहरा' बदलने का तो मन बना ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगातार चौथी हार से बचने के लिए भाजपा ने अपना 'चेहरा' बदलने का तो मन बना लिया है, लेकिन निर्णय पर आखिरी मुहर लगाने से अभी भी बच रही है। पार्टी के संसदीय बोर्ड में अधिकतर सदस्यों की सहमति के बाद रविवार को ही प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल से आगे मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में हर्षव‌र्द्धन को बढ़ाने की संभावना थी। लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में घोषणा हो सकती है।

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रविवार को यूं तो छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन हेतु चुनाव समिति की औपचारिक बैठक थी। बताते हैं कि कुछ वरिष्ठ सदस्यों के बीच दिल्ली पर भी चर्चा हुई। चिंता सिर्फ विजय गोयल को लेकर थी। इससे परिचित गोयल भी परेशान दिखे। वह कई बार कभी आगे के दरवाजे से तो कभी पीछे के दरवाजे से भाजपा कार्यालय में आते-जाते रहे। अपनी ओर से वह इस कोशिश में लगे रहे कि फिलहाल कोई मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित हो तो खुद उनका नाम आए।

दरअसल संसदीय बोर्ड के अधिकतर सदस्यों का मानना है कि गोयल की छवि के साथ विधानसभा चुनाव में उतरे तो चौथी हार तय है। खासकर तब जबकि वह परोक्ष रूप से खुद को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बताने में कोई कोताही नहीं कर रहे हैं। बल्कि एक तरह से वह यह भ्रम फैला चुके हैं कि भाजपा की जीत हुई तो कमान उन्हीं के हाथ होगी। ऐसे में हर्षव‌र्द्धन के रूप में ईमानदार चेहरा देकर पार्टी लड़ाई में सशक्त रूप से उतरना चाहती है। लेकिन यह आशंका भी है कि अब जबकि चुनाव में महज डेढ़ महीने शेष है तो नई घोषणा कितना असर करेगी। साथ ही गोयल समर्थकों की ओर से घात की भी शंका है। लिहाजा उन्हें थोड़ा और समझाया जा सकता है।

कुछ दिनों पहले जहां गोयल समर्थकों ने पार्टी मुख्यालय समेत प्रदेश प्रभारी नितिन गडकरी के आवास पर नारेबाजी की थी। वहीं रविवार को भी बैठक के बीच ही हर्षव‌र्द्धन के नाम के भी नारे लगे। हालांकि इसे लेकर पार्टी नेताओं के बीच भी चर्चा रही कि यह समर्थक कौन थे और किसके थे। गोयल की बेचैनी अपने चरम पर थी। पूरे दिन वह कभी पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के आवास पर तो कभी कार्यालय में दिखे। जब पूरा कार्यालय खाली हो गया और प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी तथा राजनाथ आगे के दरवाजे से निकल गए तो गोयल दूसरे दरवाजे से संगठन महामंत्री रामलाल के कार्यालय पहुंचे।

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