यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 03, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ओबामा की नसीहत के पीछे कांग्रेस!
देश में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के पीछे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुलाकात थी। कांग्रेस ...और पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के पीछे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुलाकात थी। कांग्रेस ने स्वीकार किया है कि ओबामा से भेंट के दौरान सभी विषयों पर बात हुई, जिसमें घरेलू राजनीति पर चर्चा भी शामिल थी। कांग्रेस प्रवक्ता व राज्य सभा में पार्टी के उपनेता आंनद शर्मा ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय मुद्दों पर बात हुई। इसमें अफगानिस्तान के हालात से लेकर परमाणु करार जैसे विषय शामिल थे।
सूत्रों के मुताबिक, ओबामा से बातचीत में देश के अंदरूनी हालात पर भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दोनों सरकारों में फर्क के बारे में पूछे जाने पर नई सरकार व उससे जुड़े संगठनों विशेषकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विहिप के क्रियाकलापों पर भी बात हुई। जाहिर है कि विदेशी मेहमान से भारत की अंदरूनी राजनीति पर चर्चा नए विवाद का विषय बन सकता है।
गौरतलब है कि इस मुलाकात के अगले ही दिन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में धार्मिक आजादी पर चर्चा करते हुए कहा था कि भारत धर्म के नाम पर नहीं बंटेगा तो जरूर तरक्की करेगा। ओबामा के इस बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर ताबड़तोड़ हमले किए थे।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा था कि क्या प्रधानमंत्री संघ परिवार में अपने मित्रों को 'घर वापसी' को सही ठहराना बंद करने की सलाह देंगे। जबकि भाजपा या सरकार की ओर से ओबामा के भाषण पर कोई टिप्पणी नहीं की गई थी।
अब कांग्रेस सूत्रों की ओर से दी जा रही जानकारी नए विवादों को जन्म दे सकती है। कूटनीतिक तौर पर विदेशी मेहमानों से विपक्षी नेताओं के मिलने का चलन रहा है, लेकिन उनके समक्ष घरेलू राजनीति पर चर्चा नहीं की जाती है।
