यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
क्लाइमेट बदलाव से आई कश्मीर में बाढ़
सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरनमेंट (सीएसई) ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में भयंकर बाढ़ के लिए क्लाइमेट में बदलाव जिम्मेदार ...और पढ़ें

नई दिल्ली। सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरनमेंट (सीएसई) ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में भयंकर बाढ़ के लिए क्लाइमेट में बदलाव जिम्मेदार हो सकता है।
सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण के मुताबिक, 2005 में मुंबई, 2010 में लेह, 2013 में उत्तराखंड और अब जम्मू-कश्मीर में भयंकर बारिश में एक पैटर्न दिखता है, जो क्लाइमेट में आए बदलावों का परिणाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ के लिए अनियंत्रित विकास भी जिम्मेदार है, खासकर नदियों के किनारे किया गया विकास। उन्होंने बताया कि पिछले 100 सालों में श्रीनगर की 50 फीसदी से ज्यादा झीलों, तालाबों और गीली जमीन पर बिल्डिंग और सड़कें बनाने के लिए अतिक्रमण किया गया। झेलम नदी के किनारे पर ऐसा ही अतिक्रमण हुआ है, जिसके चलते नदी की जल निकासी की क्षमता तेजी से कम हुई है।
सीएसई के उप महानिदेशक चंद्र भूषण ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भयंकर बारिश की घटनाओं से निपटने के लिए तैयार नहीं है। राज्य में बाढ़ के पूर्वानुमान का कोई तंत्र नहीं है। यहां का प्राकृतिक आपदा तंत्र भी पूरी तरह विकसित नहीं है।
