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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अमेरिका के बाद चीन ने भी सात फीसद से अधिक बढ़ाया अपना रक्षा बजट

By Kamal VermaEdited By:
Published: Sat, 04 Mar 2017 11:18 AM (IST)Updated: Sat, 04 Mar 2017 04:44 PM (IST)

चीन ने अपने रक्षा बजट में करीब सात फीसद से ज्‍यादा करने का एलान किया है। इसका औपचारिक एलान कल किया जाएगा।

अमेरिका के बाद चीन ने भी सात फीसद से अधिक बढ़ाया अपना रक्षा बजट
अमेरिका के बाद चीन ने भी सात फीसद से अधिक बढ़ाया अपना रक्षा बजट

बीजिंग, रायटर/प्रेट्र : दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी दखल और पूर्व एशियाई देशों के साथ तनातनी के बावजूद बीजिंग अपने रक्षा खर्च में इस बार भी सात फीसद वृद्धि करने जा रहा है। पिछले वर्ष चीन ने 7.6 फीसद की वृद्धि की थी। बीते साल उसका रक्षा खर्च 138.4 अरब डॉलर (9233 अरब रुपये) रहा। संसद के वार्षिक सत्र से एक दिन पहले प्रवक्ता फू यिंग ने शनिवार को आगामी सैन्य खर्च का अनुमान जाहिर किया।

चीन 2010 से अपने रक्षा खर्च में इकाई संख्या में ही वृद्धि कर रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका ने रक्षा खर्च में 10 फीसद वृद्धि का प्रस्ताव किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 2017 का सैन्य खर्च 603 अरब डॉलर (40227 अरब रुपये) करने का प्रस्ताव रखा है। दक्षिण चीन सागर में दोनों देशों के बीच तनातनी और ताइवान को लेकर तनाव है।

इसी सप्ताह सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कम से कम 10 फीसद वृद्धि का आह्वान किया था। अखबार ने ट्रंप द्वारा पैदा की गई अनिश्चितता का बजट में जवाब दिए जाने का अनुमान जाहिर किया था। एक रिटायर जनरल ने कहा था कि अमेरिका के मुकाबले रक्षा खर्च में 12 फीसद वृद्धि किया जाना जरूरी है।

संसद की प्रवक्ता फू यिंग ने कहा कि रक्षा खर्च जीडीपी का 1.3 फीसद रहेगा। यही स्तर पिछले कुछ वर्षो से है। रक्षा खर्च की वास्तविक संख्या रविवार को जारी की जाएगी। रविवार से संसद का सालाना सत्र शुरू होने जा रहा है।

सेना का मनोबल सबसे बड़ी चिंता

चीन की सेना के सामने सबसे बड़ी चिंता 300,000 सैनिकों को लेकर है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2015 में सैनिकों की संख्या कम करने की घोषणा की थी। यह कटौती 2017 के अंत तक जारी रहेगी। पिछले महीने चीन के सैनिकों ने बीजिंग में प्रदर्शन किया था। दो दिनों तक चले प्रदर्शन में रिटायरमेंट लाभ की मांग की गई थी।

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