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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

निलंबन के पहले नोटिस मिले: आइएएस

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Published: Thu, 08 Aug 2013 06:11 AM (IST)Updated: Thu, 08 Aug 2013 06:13 AM (IST)

देश का प्रशासन संभाल रहे 4700 से अधिक सदस्यों वाले आइएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने प्रशासनिक अधिकारियों के निलंबन संबंधी नियम ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। देश का प्रशासन संभाल रहे 4700 से अधिक सदस्यों वाले आइएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने प्रशासनिक अधिकारियों के निलंबन संबंधी नियम बदलने को कहा है। एसोसिएशन का कहना है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा [आइएसएस] के किसी अधिकारी का निलंबन से पहले केंद्र सरकार की स्वीकृति लेने का नियम बनाया जाए। एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले की एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल का निलंबन तत्काल समाप्त करने की मांग की है।

एसोसिएशन का यह प्रस्ताव भी दुर्गा का हाल में हुए निलंबन के मद्देनजर दिया गया है। दुर्गा उत्तर प्रदेश कैडर की 2010 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा [आइएएस] की अधिकारी हैं। उन्होंने एसडीएम के रूप में जिले में सक्रिय बालू खनन माफिया की गतिविधियों पर रोक लगाई थी। एसोसिएशन के सचिव संजय आर भूस रेड्डी ने कहा, अखिल भारतीय सेवाओं से जुड़े सभी नियमों खासकर ऑल इंडिया सर्विसेज [डिसप्लनेरी एंड अपील्स रुल्स, 1969] को फिर से देखें। उसमें राज्य सरकार के नियंत्रण में काम कर रहे किसी आइएएस अधिकारी को निलंबित करने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेने का प्रावधान किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने किसी आइएएस अधिकारी को निलंबित करने से पहले एक खास समय सीमा के अंदर 'कारण बताओ नोटिस' देना अनिवार्य बनाने का प्रावधान करने की संस्तुति की है। साथ ही कहा है कि उस कारण बताओ नोटिस का जवाब पढ़ने के बाद ही उस अधिकारी के निलंबन पर निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके लिए एसोसिएशन के सदस्य हाल में केंद्रीय कार्मिक राज्यमंत्री वी नारायणसामी से भी मिले थे।

नागपाल के निलंबन के खिलाफ भाजपा और बसपा जैसी विपक्षी पार्टियों ने तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इन दलों का आरोप है कि दुर्गा का निलंबन बालू माफिया के खिलाफ कार्रवाई के कारण किया गया है। दुर्गा ने गौतमबुद्ध नगर जिले की एसडीएम के रूप में बालू खनन माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। उन्हें प्रत्यक्ष तौर पर बगैर उचित प्रक्रिया अपनाए बनाई जा रही एक मस्जिद की दीवार गिराने का आदेश देने के कारण निलंबित किया गया है। निलंबन के बाद दुर्गा अभी लखनऊ स्थित राजस्व बोर्ड से जुड़ी हैं।

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