यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गंगा में डाल्फिन की संख्या पता लगाने को सर्वेक्षण शुरू
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में नरोरा से बिजनौर के बीच सर्वेक्षण का पहला चरण एक मार्च को शुरू किया गया।

नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्र सरकार ने गंगा की लुप्तप्राय डाल्फिन समेत जलचर जीव की संख्या पता लगाने के लिए पूरी नदी का सर्वेक्षण शुरू किया है। यह सर्वेक्षण नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। सर्वेक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नदी के जीवों की संख्या से पानी की गुणवत्ता का पता चलता है। इससे मिले वैज्ञानिक डाटा की मदद से सरकार गंगा के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए उपयुक्त कदम उठाएगी।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में नरोरा से बिजनौर के बीच सर्वेक्षण का पहला चरण एक मार्च को शुरू किया गया। इस दौरान गंगा में करीब 165 किलोमीटर में राष्ट्रीय जल प्राणी डाल्फिन की संख्या का पता लगाया जाएगा। इलाहाबाद से वाराणसी (करीब 250 किलोमीटर) तक गणना का काम इस सप्ताह शुरू होने की उम्मीद है। उत्तराखंड के हर्षिल से भी नदी में मछली की प्रजातियों का पता लगाने का अध्ययन शुरू किया गया है।
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यह सर्वेक्षण भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के जरिये कराया जा रहा है। डब्ल्यूआइआइ पर्यावरण और वन मंत्रालय की स्वायत्त संस्था है। एनएमसीजी के सलाहकार और इस मामले के विशेषज्ञ संदीप बेहरा ने नरोरा से कानपुर के बीच प्रदूषण के चलते गंगा में डाल्फिन के विलुप्त होने पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण से डाल्फिन की स्थिति और उनको होने वाले खतरे के स्तर का पता चलेगा। गंगा में पहले भी टुकड़ों में सर्वेक्षण कराए गए लेकिन पहली बार व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। एनएमसीजी के मुताबिक, गंगा में डाल्फिनों के अलावा घडि़याल और कछुओं की संख्या का भी पता लगाया जाएगा। यह गणना इस साल अक्टूबर तक चलेगी। बेहरा ने कहा कि इसके बाद इसी तरह की गणना गंगा की सहायक नदियों में कराई जाएगी।
उप्र में हुआ था सर्वेक्षण
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सर्वेक्षण 2015 में किया जाना था। लेकिन राज्यों के बीच समन्वय के अभाव में ऐसा नहीं हो सका। हालांकि उत्तर प्रदेश ने सर्वेक्षण कराया था। पांच अक्टूबर से आठ अक्टूबर 2015 के बीच कराए गए इस सर्वेक्षण में 1,263 डाल्फिन पाई गई थीं। यह सर्वेक्षण राज्य में 3350 किलोमीटर में गंगा और उसकी सहायक नदियों में कराया गया था।
