यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मोदी ने भंग कीं चार कैबिनेट समितियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संप्रग सरकार की विरासत को पूरी तरह से खत्म करने के लिए एक और फैसला लिया ...और पढ़ें

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संप्रग सरकार की विरासत को पूरी तरह से खत्म करने के लिए एक और फैसला लिया है। मंगलवार को मोदी ने फैसलों में तेजी लाने के उद्देश्य से विशिष्ट पहचान प्राधिकरण [यूआइडीएआइ] पर गठित समिति सहित कुल चार कैबिनेट समितियां भंग कर दीं।
प्रधानमंत्री ने मूल्य निर्धारण, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन और विश्व व्यापार संगठन पर गठित कैबिनेट समितियों को भी भंग कर दिया। अधिकारिक बयान में बताया गया कि यूआइडीएआइ से संबंधित बड़े मुद्दों पर फैसला लिया जा चुका है। बाकी के मसलों को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति के समक्ष रखा जाएगा। लिहाजा, इससे संबंधित समिति को भंग कर दिया गया है। मूल्यों पर गठित समिति का काम अब आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति देखेगी। प्राकृतिक आपदा प्रबंधन की कैबिनेट समिति का काम संकट की स्थिति में कैबिनेट सचिव के अधीन समिति देखेगी। विश्व व्यापार संगठन पर बनी कैबिनेट समिति का काम भी आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ही देखेगी। ज्यादा जरूरत पड़ने पर पूर्ण कैबिनेट इसके काम को देखेगी। इससे पहले प्रधानमंत्री ने संप्रग सरकार में गठित सभी ईजीओएम और जीओएम को भंग कर दिया था। कहा जा रहा है कि मोदी फैसलों में तेजी लाने के लिए ये सभी कदम उठा रहे हैं। इसके अलावा मोदी नियुक्ति समिति, आर्थिक मामलों की समिति, संसदीय मामलों की समिति, राजनीतिक मामलों की समिति और केंद्रीय सुरक्षा समिति का पुनर्गठन करेंगे।
सरकार बदलने पर न हटाए जाएं अफसर
सिर्फ सरकार बदलने पर सेवाएं दे रहे अफसरों को नहीं हटाया जाना चाहिए। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग [एनसीपीसीआर] की अध्यक्ष कुशल सिंह ने कहा कि अगर सरकार इस्तीफा देने का दबाव बनाने लगेंगे तो आयोग सही ढंग से काम नहीं कर पाएंगे।
कथित तौर पर सिंह को महिला व बाल विकास मंत्रालय ने 30 मई और 2 जून को फोन कर एनसीपीसीआर से इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया था। सिंह ने कहा कि जिन अफसरों का कार्यकाल बाकी है, उन्हें नहीं हटाया जाना चाहिए। सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मंत्रालय को बिना पूरी प्रक्रिया अपनाए उन्हें हटाने से रोकने का निर्देश देने की मांग की है। आयोग में उनका कार्यकाल 10 अक्टूबर, 2014 को पूरा हो रहा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिका पर जवाब तलब किया है और महिला व बाल विकास मंत्रालय को नोटिस जारी कर 28 जुलाई तक जवाब देने को कहा है।
