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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 28, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, किसके इशारे पर हलफनामे से हटा इशरत का नाम

By Gunateet OjhaEdited By:
Published: Sun, 28 Feb 2016 08:26 PM (IST)Updated: Mon, 29 Feb 2016 06:08 AM (IST)

जेएनयू और हैदराबाद विश्वविद्यालय के मामले में आक्रामक सरकार के रुख पर पलटवार करते हुए जहां विपक्ष ने विशेषाधिकार हनन का पैंतरा चल दिया है।

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जेएनयू और हैदराबाद विश्वविद्यालय के मामले में आक्रामक सरकार के रुख पर पलटवार करते हुए जहां विपक्ष ने विशेषाधिकार हनन का पैंतरा चल दिया है। वहीं भाजपा आतंकी इशरत जहां को बचाने में शामिल रही संप्रग सरकार को घेरने के लिए अब इसकी औपचारिक जांच चाहती है। पार्टी ने सरकार से मांग की कि इसका खुलासा हो कि किसने इशरत का नाम हलफनामा से हटवाया था।

इशरत मुठभेड़ की जांच से रची थी मोदी को फंसाने की साजिश

भाजपा प्रवक्ता एम जे अकबर ने इशरत जहां को निर्दोष साबित करने के लिए हलफनामे में बदलाव और एनआइए की रिपोर्ट में काटछांट की जांच की मांग की है। अकबर ने कहा कि बतौर गृहसचिव जीके पिल्लई को वस्तुस्थिति की जानकारी थी। उन्होंने जो कुछ कहा है वह सच है। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और ताकि इसके पीछे उद्देश्य का खुलासा हो। चिदंबरम के साथ ही उन्होंने जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारे लगाने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।

पूर्व गृह सचिव का खुलासा, इशरत जहां की पहचान छिपाने के लिए था दबाव

बहरहाल, मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को लेकर पार्टी जरूर थोड़ी बचाव की मुद्रा मे थी। अकबर ने कहा कि स्मृति ने संसद में जो भी बयान दिया है वह स्थानीय पुलिस रिपोर्ट के आधार पर दिया है। वह विपक्ष के नेताओं को रास नहीं आता है तो विशेषाधिकार हनन का दांव चला रहा है। गौरतलब है कि राज्यसभा में स्मृति ईरानी के बयान के बाद विपक्ष के नेता काफी उग्र थे और काफी तीखी बहस हुई। कांग्रेस, माकपा, जदयू समेत कुछ दूसरी पार्टियों के नेताओं ने स्मृति के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने का मन बनाया है।