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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 28, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वायुसेना को 200 जेट लड़ाकू विमानों की जरूरत : अरूप राहा

By Rajesh KumarEdited By:
Published: Wed, 28 Dec 2016 06:52 PM (IST)Updated: Thu, 29 Dec 2016 06:27 AM (IST)

वायुसेना प्रमुख के रुप में अपने आखिरी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान साल एयरफोर्स के साल भर का लेखा-जोखा देते हुए अरूप राहा ने यह बात कही।

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल अरूप राहा ने कहा है कि वायुसेना का एन-32 विमान अब अंडमान या बंगाल की खाड़ी के उपर उड़ान भरने के लिए बेहतर विकल्प नहीं है। इस बयान के जरिए राहा ने साफ कहा कि सैनिकों की आवाजाही के लिए अब यह जवान सुरक्षा के लिहाज से मुफीद नहीं।

वहीं फ्रांस से खरीदे जा रहे 36 राफेल लड़ाकू विमानों से वायुसेना की ताकत में इजाफा होने की बात कहते हुए राहा ने कहा कि फिर भी यह हमारी जरूरतों के लिहाज से पर्याप्त नहीं। वायुसेना को कम से कम 200 लड़ाकू जेट विमानों से लैस करने की जरूरत है।

वायुसेना प्रमुख के रुप में अपने आखिरी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान साल एयरफोर्स के साल भर का लेखा-जोखा देते हुए अरूप राहा ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि बेशक पठानकोट एयर बेस पर आतंकी हमला और 29 सैनिकों के साथ समुद्र में लापता एन-32 विमान उनके कार्यकाल की सबसे बुरी स्मृति रही। तमाम प्रयासों के बावजूद लापता विमान को ढूंढने में कामयाबी नहीं मिल पायी।

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उन्होंने कहा कि समुद्र तल से साढे तीन किलोमीटर अंदर लापता विमान के होने की आशंका के मद्देनर 40 जगहों पर खोज की मगर कामयाब नहीं हुए। इसलिए अब हमने सरकार को बड़ी संख्या में अंडरवाटर लोकेटर्स का प्रस्ताव दिया है जिसे विमान के उपर लगाया जा सके। राहा ने कहा कि एन-32 के कैरियर विमान के रुप में इस्तेमाल करने की जगह अब हम सी-295 विमान को विकल्प के रुप में देख रहे हैं।

वायुसेना की रक्षा जरूरतों की खरीद के सवाल पर राहा ने कहा कि राफेल के आने से बेशक हमारी एयरफोर्स की मारक क्षमता में इजाफा होगा। मगर हमारी सुरक्षा चुनौतियों और वातावरण को देखते हुए 36 लड़ाकू विमान ही काफी नहीं है बल्कि हमें 200 ऐसे जेट लड़ाकू विमानों से वायुसेना को लैस करना होगा। इस दिशा में हल्के लड़ाकू विमान तेजस और मध्यम स्तर के जेट विमानों की जरूरत है।

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सातवें वेतन आयोग को लेकर सैन्य बलों की आपत्तियों के दूर नहीं होने पर राहा ने जरूर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि वेतन विसंगतियां उनके कार्यकाल के दौरान दूर हो जाती तो सैनिकों के कल्याण के लिहाज से उन्हें संतोष होता।

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