यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने 60 दिन में मांगा मंत्रियों से संपत्तियों का ब्योरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट के लिए लक्ष्मण रेखा तय कर दी है। मोदी ने सभी मंत्रियों से दो ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट के लिए लक्ष्मण रेखा तय कर दी है। मोदी ने सभी मंत्रियों से दो महीने के भीतर अपनी संपत्ति, देनदारियों और व्यावसायिक हितों का ब्योरा सौंपने को कहा है। भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद पर जीरो टॉलरेंस का संकेत पहले ही दे चुके मोदी ने अपने सरकारी कुनबे से साफ कह दिया है कि उन्हें मंत्री बनने से पहले के सभी व्यावसायिक संपर्क मसलन मालिकाना हक, प्रबंधन में हिस्सेदारी खत्म करने होंगे। इतना ही नहीं मोदी ने काम तेजी और निष्पक्षता से कराने के लिए मंत्रियों से अफसरों के काम में अनावश्यक दखलंदाजी कर उन्हें अनुचित ढंग से प्रभावित करने की कोशिश नहीं करने के निर्देश जारी किए हैं।
केंद्रीय मंत्रियों के लिए गृह मंत्रालय की ओर से तैयार की गई इस आचार संहिता के अनुपालन की निगरानी खुद प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। आचार संहिता के अनुसार मंत्रियों को सुनिश्चित करना होगा कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य उनके मंत्रालय में सामान या सेवाओं की आपूर्ति से जुड़ा न हो। मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की पत्नियों व आश्रितों को विदेशी सरकारों के अधीन किसी भी तरह की नौकरी, चाहे व विदेश में हो या भारत में ज्वाइन करने से पहले प्रधानमंत्री की अनुमति लेनी होगी। अगर वे पहले से इस तरह की नौकरी में हैं तो प्रधानमंत्री को सूचित कर उनके निर्णय का इंतजार करना होगा। वैसे सामान्य तौर विदेशी मिशनों में इनकी नौकरी पर पाबंदी रहेगी।
मंत्रियों को अपनी व अपने परिजनों की सभी अचल संपत्तियों, शेयरों, ऋणपत्रों, नकदी, आभूषण की अनुमानित कीमत का ब्योरा देना होगा। मंत्री रहने तक हर साल 31 अक्टूबर तक ये सभी ब्योरे उपलब्ध कराने होंगे। मंत्रियों को सरकार से अचल संपत्ति खरीदने या उसे बेचने का भी अधिकार नहीं होगा। केवल अनिवार्य मामलों में सरकार उनकी संपत्ति अधिग्रहीत कर सकती है। मंत्री न तो कोई कारोबार शुरू कर सकेंगे और न उसमें शामिल हो सकते हैं। उनके परिजनों व आश्रितों के भी ऐसे किसी व्यवसाय में शामिल होने पर रोक होगी जो सरकार को सामानं/सेवाओं की आपूर्ति, खासकर सरकारी लाइसेंस, परमिट, कोटा, लीज आदि से संबंधित हों। अगर मंत्री का व्यावसायिक हित या प्रबंधन में हिस्सेदारी है तो पति/पत्नी को छोड़ परिवार के उस वयस्क सदस्य को हस्तांतरित करना होगा, जो मंत्री बनने से पहले से व्यवसाय से जुड़ा था। पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयरों के मामले में मंत्रियों को उन कंपनियों के शेयर बेचने होंगे जिनमें प्रधानमंत्री को लगे कि इससे कर्तव्यपालन व प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।
मंत्री के परिवार का कोई सदस्य कोई व्यवसाय शुरू करता है या किसी कंपनी के प्रबंधन में शामिल होता है तो उसे प्रधानमंत्री को इसकी सूचना देनी होगी। कोई भी मंत्री स्वयं या परिजन के जरिए किसी भी तरह का राजनीतिक, चेरिटेबल या अन्य योगदान अपने लिए प्राप्त नहीं करेगा। अगर उसे किसी पंजीकृत सोसाइटी, चेरिटेबल निकाय, सरकारी मान्यता प्राप्त अधिकरण या राजनीतिक दल के लिए राशि या चेक प्राप्त होता है तो उसे तुरंत उस संगठन के विशिष्ट पदाधिकारी को भेजना होगा। इन संगठनों के अतिरिक्त मंत्री फंड जुटाने के अन्य किसी भी तरह के कार्य में शिरकत नहीं करेंगे। अपने नजदीकी रिश्तेदारों के अलावा मंत्री किसी से भी मूल्यवान तोहफा प्राप्त नहीं करेंगे। मंत्री व उनके परिजन ऐसे किसी व्यक्ति से भी तोहफा या कर्ज नहीं लेंगे, जिसके साथ उनकी सरकारी डीलिंग हो और कामकाज प्रभावित होने का अंदेशा हो। विदेश दौरों पर मंत्री विदेशी नेताओं से उपहार ले सकते हैं। प्रतीकात्मक प्रकृति के स्वार्ड ऑफ ऑनर जैसे सभी उपहार मंत्री अपने पास रख सकते हैं, जबकि गैर प्रतीकात्मक प्रकृति के 5000 रुपये तक के उपहार ही लेने का उन्हें अधिकार होगा। मंत्री यथासंभव सर्किट हाउस, डाक बंगला या किफायती सरकारी होटलों में ठहरेंगे।
पीएम की पाबंदी
-मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की पत्नियों व आश्रितों को विदेशी सरकारों के अधीन नौकरी ज्वाइन करने से पहले लेनी होगी अनुमति।
-पहले से ऐसी नौकरी में हैं तो पीएम को सूचित कर निर्णय का इंतजार करना होगा।
-मंत्री न तो कोई कारोबार शुरू कर सकेंगे और न उसमें शामिल हो सकते हैं।
-पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयरों के मामले में मंत्रियों को उन कंपनियों के शेयर बेचने होंगे जिन पर पीएम को आपत्ति हो।
-मंत्रियों के परिजन व आश्रित ऐसे व्यवसाय नहीं करेंगे, जो सरकार को सामानं/सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हों।
