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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 10, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अय्यर को अच्छा लगा कांग्रेस का हारना

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Published: Tue, 10 Dec 2013 10:38 PM (IST)Updated: Tue, 10 Dec 2013 10:40 PM (IST)

विधानसभा चुनाव नतीजों पर सहयोगियों की आलोचना के साथ अब कांग्रेस पार्टी में भी चुनावी रणनीति को लेकर रोष और ...और पढ़ें

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नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। विधानसभा चुनाव नतीजों पर सहयोगियों की आलोचना के साथ अब कांग्रेस पार्टी में भी चुनावी रणनीति को लेकर रोष और व्यापक बदलाव के स्वर उठने लगे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार को अच्छा बताते हुए पार्टी में सुधार व परिवर्तन के लिए मौका करार दिया है। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की आशंका भी जताई है। अय्यर ने पार्टी में गंभीर बदलाव की वकालत कर संगठन के स्तर पर क्रांतिकारी स्तर पर कदम उठाने की मांग की है। इस बीच पार्टी ने अय्यर के मीडिया में अपने विचार रखने पर खेद जताया।

चार विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस में आत्मचिंतन की जरूरत को लेकर उठे सुरों को नाकाफी बताते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा कि अब काफी देर हो चुकी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य का कहना है कि पार्टी में संगठनात्मक सुधारों के लिए 1980 में उमाशंकर दीक्षित रिपोर्ट को स्वीकारा जा चुका है। वहीं एके एंटनी समिति की भी कई सिफारिशों को 13 साल पहले ही माना जा चुका है। लिहाजा अब वक्त है कि इन्हें लागू किया जाए।

अय्यर का कहना था कि देश के 32 लाख पंचायत प्रतिनिधियों में एक तिहाई कांग्रेसी हैं। दस लाख कैडर की पार्टी देश में अन्य किसी भी पार्टी को धूल चटा सकती है लेकिन जब उनका इस्तेमाल नहीं होगा तो इसी तरह के नतीजे आएंगे। उन्होंने कहा कि निचले स्तर से ही नेतृत्व परिवर्तन की भी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। निचले स्तर से पार्टी से लोगों के जुड़ाव पर जोर हो ताकि जनता कांग्रेस के प्रति अपनापन महसूस कर सके।

हालांकि अय्यर ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार का दोषी मानने से इन्कार कर दिया। वहीं राहुल की ओर से संगठनात्मक सुधार के प्रयासों का समर्थन करते हुई अय्यर ने कहा कि सत्ता में रहते हुए संगठन में बड़े बदलाव संभव नहीं है। लिहाजा सरकार से बाहर जाने के बाद सुधारों पर अमल संभव हो सकेगा।

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