यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 17, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मणिशंकर को वफादारी का तोहफा
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नजदीकी रहे मणिशंकर अय्यर को एक बार फिर पार्टी से वफादारी का इनाम मिल रहा ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नजदीकी रहे मणिशंकर अय्यर को एक बार फिर पार्टी से वफादारी का इनाम मिल रहा है। वर्तमान सरकार का कार्यकाल भले ही सात या आठ महीने बचा हो, लेकिन सरकार ने राष्ट्रपति कोर्ट से अय्यर को दो साल के लिए कैबिनेट मंत्री का दर्जा सुनिश्चित कर दिया है। उन्हें क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों (जेडसीसी) की समन्वय समिति का अध्यक्ष बनाया जा रहा है।
संप्रग की पिछली सरकार में पेट्रोलियम जैसे हाईप्रोफाइल मंत्रालयों से लेकर खेलकूद और पंचायत जैसे जमीनी मंत्रालयों का जिम्मा संभाल चुके अय्यर मनमोहन सरकार के दूसरे कार्यकाल में हाशिए पर रहे हैं। लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें राज्यसभा में मनोनीत किया गया था। संप्रग-दो में उन्हें मनमोहन के कैबिनेट में जगह नहीं मिली, लेकिन सरकार जाते-जाते उन्हें लालबत्ती मुहैया करा रही है। दरअसल, उन्हें न सिर्फ कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा रहा है बल्कि वह काम दिया जा रहा है जिसकी शुरुआत राजीव गांधी के समय हुई थी। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते ही जेडसीसी का गठन किया गया था। उस वक्त प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव के रूप में अय्यर के पास ही इसका कार्यभार था। वर्ष 2010 में मनमोहन ने भी अय्यर की अध्यक्षता में समिति बनाकर इन केंद्रों के कामकाज की समीक्षा को कहा था।
अय्यर का मानना था कि इन केंद्रों के जरिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कामकाज बढ़ाया जाना चाहिए। दरअसल, कांग्रेस के अंदर भी वह उन इक्के-दुक्के नेताओं में हैं जो सोनिया-राहुल युग में भी राजीव गांधी का झंडा ऊपर करने से नहीं चूकते। बताते हैं कि अय्यर की समिति में छह सांस्कृति केंद्रों के निदेशक सदस्य के तौर पर शामिल होंगे। वहीं सातवें केंद्र के निदेशक सदस्य सचिव होंगे। देश हर हिस्से की सांस्कृतिक विरासत से पूरे देश को जोड़ना समिति का जिम्मा होगा।
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