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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 28, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चीन की बेचैनी के बावजूद अग्नि-5 जैसे परीक्षण रहेंगे जारी

By Kamal VermaEdited By:
Published: Wed, 28 Dec 2016 10:26 PM (IST)Updated: Thu, 29 Dec 2016 09:04 AM (IST)

निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल अरूप राहा ने कहा है कि चीन की बेचैनी के बावजूद अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का आगे भी परीक्षण अभियान जारी रहना चाहिए।

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नई दिल्ली (संजय मिश्र)। भारतीय वायुसेना का साफ मानना है कि परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-5 मिसाइल के परीक्षण पर सामने आयी चीन की बेचैनी के बावजूद इस अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का आगे भी परीक्षण अभियान जारी रहना चाहिए। निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल अरूप राहा ने चीन का नाम लिए बिना कहा कि हम दुश्मन के घर के भीतर तक जाकर निशाने साधने की अपनी प्रतिरोधी क्षमता बढ़ा रहे हैं। इसलिए अग्नि-5 जैसे मिसाइल का परीक्षण जारी रहना चाहिए। चीन के इन एतराजों के बीच वायुसेना पश्चिम बंगाल के पानागढ में सी-130 जे सुपर विमानों का दूसरा स्कावड्रन मुख्यालय तैयार होने के करीब है।

चीन को देंगे करारा जवाब

वायुसेना प्रमुख राहा ने खुद बुधवार को इस बात की पुष्टि की कि अगले साल मार्च-अप्रैल से सी-130 जे विमान पानागढ स्कावड्रन से उड़ान भरने शुरू कर देंगे। पहाड़ी इलाकों में वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिहाज से इस स्कावड्रन का गठन किया जा रहा है जिससे देश की पूर्वी सीमाओं पर आक्रमण या युद्ध की किसी भी चुनौती का तत्काल माकूल जवाब दिया जा सकेगा। जाहिर तौर पर पूर्वी सीमा पर चीन हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। वायुसेना का यह पहला बेड़ा होगा जो पर्वतीय इलाकों में युद्ध लड़ने में पूरी तरह सक्षम होगा। भारतीय वायुसेना के इस बेड़े के गठन को लेकर भी चीन असहज है।

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अग्नि-5 आईसीबीएम मिसाइल के परीक्षण पर भड़का चीन

अग्नि-5 आईसीबीएम मिसाइल के सफल परीक्षण पर चीन के एतराजों को वायुसेना प्रमुख ने नजरअंदाज कर दिया। उनका कहना था कि अंतराष्ट्रीय कूटनीति में चाहे वह सामान्य कूटनीति हो या सैन्य कूटनीति इस तरह के आव-भाव आते रहेंगे। मगर हमें इसे बेपरवाह होकर अपने लक्ष्य और जरूरतों को पूरा करने पर फोकस करने की जरूरत है। हमें अपनी सुरक्षा चुनौतियों के लिहाज से जो प्रतिरोधी क्षमता हासिल करनी है उस पर आगे बढ़ते रहना चाहिए। हालांकि वायुसेना प्रमुख ने इस दौरान सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया मगर उनका संकेतों में इशारा साफ था। राहा ने कहा कि अपनी सुरक्षा और सैन्य प्रतिरोधी क्षमता को चुनौतियों के हिसाब से इसलिए भी बढ़ाते रहने की जरूरत है क्योंकि हमे पहले कई बार लड़ाई के लिए बाध्य किया गया है।

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अग्नि पांच की जद में चीन

गौरतलब है कि भारत ने इसी हफ्ते 5000 किलोमीटर तक जाकर मार करने वाली परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। इसको लेकर चीन ने सवाल उठाते हुए उम्मीद जताई थी कि भारत का यह मिसाइल परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के मुताबिक होगा। अग्नि-5 की मारक क्षमता की जद में चीन के अधिकांश हिस्से आ जाते हैं। खास बात यह है कि अग्नि-5 जैसी आईसीबीएम मिसाइल से लैस देशों अमेरिका, रुस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ भारत भी इस क्लब में शामिल हो गया है।

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