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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 19, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

फिर रूठ गए आडवाणी, मान-मनौव्वल का दौर जारी

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Published: Wed, 19 Mar 2014 09:46 AM (IST)Updated: Thu, 20 Mar 2014 01:04 AM (IST)

भाजपा के लौहपुरुष कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी ने ऐन चुनावों के वक्त एक बार फिर से पूरी पार्टी और ...और पढ़ें

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नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भाजपा के लौहपुरुष कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी ने ऐन चुनावों के वक्त एक बार फिर से पूरी पार्टी और संघ परिवार को परेशानी में डाल दिया। बुधवार को भाजपा चुनाव समिति की बैठक आडवाणी के रूठने और मनाने में ही दब गई। पहले तो संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति की बैठक से ही गैरहाजिर रहकर उन्होंने गोवा की चर्चित भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी जैसे हालात खड़े कर दिए। इसके बाद उन्हें गांधीनगर से चुनाव लड़ाने का सर्वसम्मत फैसला हुआ तो उससे भी नाराजगी जताकर पार्टी के सामने असहज स्थिति खड़ी कर दी। चुनाव दरवाजे पर है लेकिन आडवाणी अपनी जिद के सामने पार्टी की छवि और भविष्य को भी नजरअंदाज करने पर अड़े हुए हैं। देर रात तक कभी संघ के जरिये तो कभी पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की ओर से उन्हें मनाने की कोशिशें होती रहीं। लेकिन गांधीनगर से उम्मीदवारी पर उन्होंने हामी नहीं भरी।

पूरे दिन चले घटनाक्रम ने एक बार फिर से भाजपा और संघ को सकते में डाल दिया है। यही कारण है कि विवाद नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात हुई। वहीं, सुषमा स्वराज और नितिन गडकरी ने भी आडवाणी से मुलाकात की। बाद में गडकरी और सुषमा पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिलने पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक, कुछ ही दिन पहले अपने पुराने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर से ही चुनाव लड़ने की सार्वजनिक इच्छा जता चुके आडवाणी अब शायद इससे खफा है कि उनकी सीट घोषित होने में देर क्यों लगी जबकि पार्टी के दूसरे बड़े नेताओं को लेकर संशय पहले ही खत्म हो गया था। बुधवार को संसदीय बोर्ड की बैठक में उस वक्त पार्टी नेता परेशान हो गए, जब आडवाणी नहीं पहुंचे। वरिष्ठ नेताओं ने उनसे बात की तो उन्होंने आने से मना कर दिया। गौरतलब है कि आडवाणी को लेकर गुजरात इकाई में विरोध तो था, लेकिन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद प्रदेश समिति ने गांधीनगर से उनका अकेला नाम भेजा था। चुनाव समिति में भी सर्वसम्मत फैसला हो गया कि आडवाणी गांधीनगर से ही लड़ें।

विवाद फिर भी खड़ा हो गया। वह चुनाव समिति की बैठक में भी नहीं पहुंचे। हालांकि, आडवाणी के नजदीकियों का कहना है कि चूंकि उनके ही बारे में फैसला होना था, लिहाजा वह मौजूद नहीं थे। लेकिन बात इतनी सीधी नहीं थी। दरअसल पूरे दिन आडवाणी बैठक से दूर रहे। जबकि भोपाल में उनके समर्थन में पोस्टर लग गए। माना जा रहा था कि गांधीनगर के अलावा वह अपने लिए एक खिड़की भोपाल से भी खोलना चाहते थे। हालांकि, इसे अपने नजदीकियों को टिकट दिलाने के लिए दबाव की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। संभवत: वह अहमदाबाद पूर्व से अपने नजदीकी हरिन पाठक की सीट सुनिश्चित करना चाहते थे। इस सीट पर अभी तक चुनाव समिति ने फैसला नहीं लिया है।

पढ़ें: मोदी से सिर्फ चुनाव नहीं लड़ना है, उन्हें हराना है: केजरीवाल

सूत्रों के अनुसार चुनाव समिति ने एकराय से फैसला किया कि आडवाणी अपनी सीट गांधीनगर से ही चुनाव लड़ेंगे। दरअसल पार्टी यह संकेत देना नहीं चाहती है कि चुनाव के दरवाजे पर खड़ी भाजपा में अभी भी खींचतान है। वह भी शीर्ष स्तर पर। सूत्रों के अनुसार खुद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिह ने उनसे फोन पर बात की। लेकिन आडवाणी राजी नहीं हुए। तय हुआ है कि सुषमा स्वराज उनसे बात कर गांधीनगर के लिए राजी करेंगी। इसी बीच संघ को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। बताते हैं कि आडवाणी ने संकेत भेजा है कि उनपर दबाव बनाने की कोशिशें हो रही हैं। भविष्य में फिर आडवाणी कोई नया विवाद न खड़ा करें, इसको लेकर संघ और भाजपा का नेतृत्व सक्रिय हो गया है। मोदी की भागवत से और आडवाणी से सुषमा व गडकरी की मुलाकात इसी कवायद का हिस्सा मानी जा रही है। संघ ने भी ताकीद कर दिया है कि अब इस मौके पर कोई विवाद नहीं खड़ा होना चाहिए।

उम्मीदवारों की सूची:-

1-संभल-सत्यपाल सैनी

2-मथुरा-हेमा मालिनी

3-फतेहपुर सीकरी-चौधरी बाबूलाल

4-शाहजहांपुर-श्रीमती कृष्णा राज

5-धौरहरा-श्रीमती रेखा वर्मा

6-अकबरपुर-देवेंद्र सिंह भोले

7-जालौन-भानू वर्मा

8-हमीरपुर-पुष्पेंद्र सिंह चंदेल

9-इलाहाबाद-श्यामा चरण गुप्त

10-अंबेदकरनगर-हरिओम पांडे

11-कैसरगंज-ब्रजभूषण शरण सिंह

12-गोंडा-कीर्ति वर्धन सिंह

13-डुमरियागंज-जगदंबिका पाल

14-कुशीनगर-राजेश पांडे

15-गाजीपुर-मनोज सिन्हा

राजस्थान के जयपुर ग्रामीण से राज्यवर्धन सिंह राठौर

बिहार के बक्सर से अश्रि्वनी चौबे, सुपौल से कामेश्वर चौपाल

झंझारपुर से देवेंद्र कुमार चौधरी