यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'अपना' ठेकेदार था, 41 लाख का काम कराकर 1.07 करोड़ दे दिए
41.42 लाख रुपये का काम कराकर 1.07 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया।

आशीष झा, रांची। पुलिस के कुछ अधिकारी कुछ न कुछ ऐसा कर ही जाते हैं, जिससे विभाग की 'बदनामी' होती है। ऐसा ही एक कारनामा चाईबासा में हुआ है। पुलिस भवनों की घेराबंदी के लिए दो ठेकेदारों का चयन अलग से कर लिया गया और भुगतान करने में भी अधिकारियों ने 'दिल खोलकर' निर्णय लिया। यही कारण है कि 41.42 लाख रुपये का काम कराकर 1.07 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। ढाई गुना से भी अधिक। अब दो साल बाद भी पुलिस अतिरिक्त भुगतान की राशि वसूल नहीं पाई है। मामला 2015 का है।
थानों और पुलिस चौकियों की सुरक्षा के लिए कंटीले तारों का बार लगाने की योजना पुलिस मुख्यालय से बनी और सभी जिलों को इसके लिए निर्देशित कर दिया गया। दर भी तय थी और ठेकेदार भी लेकिन चाईबासा में मनमानी का खेल चला। यहां दर से छेड़छाड़ तो नहीं की गई लेकिन ठेकेदार बदल दिए गए। पुलिस मुख्यालय से नामित दो संवेदकों को हटाकर दो नए ठेकेदारों को काम सौंप दिया गया। इन संवेदकों ने 9 पुलिस थानों में कंसटीना बाड़ (गोल आकार का कर्सीना तार जो दीवार एवं जमीन पर सुरक्षा उद्देश्य से लगाया जाता है) लगाया।
बिना टेंडर के काम:
इन दोनों ठेकेदारों को अलग से काम आवंटित करने के लिए टेंडर करना जरूरी था जिसकी अनदेखी की गई। किसी भी स्तर पर निविदा आमंत्रित नहीं की गई।
दर में कोई बदलाव नहीं:
दोनों ठेकेदारों को उसी दर पर काम आवंटित किया गया जो पुलिस मुख्यालय के स्तर से तय हुआ था। यह दर खुली निविदा के आधार पर निर्धारित तय हुई थी। 1117 रुपये प्रति मीटर जमीन पर बाड़ लगाने के लिए. 803 रुपये प्रति मीटर दीवार पर बाड़ लगाने के लिए।
हिसाब भी गलत
संवेदकों ने जनवरी और फरवरी 2015 में जमीन पर 7667 मीटर और दीवार के ऊपर 2698 मीटर बाड़ लगाया। नियमानुसार इसके एवज में 41.42 लाख रुपये का भुगतान होना था लेकिन गलत हिसाब दिखाकर 1.07 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। कुल 65.39 लाख रुपये अतिरिक्त। कैग ने पुलिस अधीक्षक, चाईबासा को दोषी ठहराते हुए लिखा है कि भुगतान करने के पूर्व वास्तविक कार्य को सुनिश्चित नहीं किया गया और इससे बड़ा नुकसान हुआ। बाद में जुलाई 2015 में ठेकेदारों से राशि वसूली करने का आदेश पुलिस अधीक्षक ने किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
