यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 30, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
एमजीएम जमशेदपुर में चार माह में 167 बच्चों की मौत
महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चार माह में 167 बच्चों की जान जा चुकी है।

जासं, जमशेदपुर। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पीआइसीयू (पेडियेट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में सोमवार देर रात एक और बच्चे की मौत हो गई। सुंदरनगर निवासी गौतम मार्डी (12) को सोमवार को ही भर्ती कराया गया था। मौत किस कारण से हुई इसके बारे में चिकित्सकों ने स्पष्ट रूप से कुछ भी बताने से इन्कार किया है। इस तरह एमजीएम के शिशु रोग विभाग में बीते चार माह में अबतक कुल 167 बच्चों की मौत हो चुकी है।
सबसे अधिक जुलाई में कुल 60 बच्चों ने दम तोड़ा है। राज्य सरकार ने जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तीन माह में 164 बच्चों की मौत को गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने बच्चों की हुई मौत के कारणों की पड़ताल के लिए विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। इस कमेटी को 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे को दैनिक जागरण ने पहली बार प्रमुखता से उठाया था। इस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
विशेषज्ञों की टीम करेगी बच्चों की मौत के मामले की जांच: राज्यपाल
एमजीएम अस्पताल में चार माह के दौरान 166 बच्चों की मौत के मामले में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों की टीम मामले की जांच करेगी। सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। सरकार व वैज्ञानिकों की टीम मिलकर इसके पीछे के कारणों का पता लगाएगी। लगातार बच्चों की मौत होना गंभीर मामला है।
जिला जज ने की जांच, हाईकोर्ट को सौंपेंगे रिपोर्ट
चार माह में 166 बच्चों की मौत के मामले की जांच के लिए प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश संजय प्रसाद मंगलवार को महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल पहुंचे। न्यायाधीश ने अस्पताल के अधीक्षक डाक्टर भारतेंदु भूषण से मौत की वजह पूछी और शिशु वार्ड का निरीक्षण किया। न्यायाधीश संजय प्रसाद ने मीडिया को बताया कि वे अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट को जल्द सौंप देंगे। इस अस्पताल में मरीजों का दबाव है और संसाधनों की कमी है। अधीक्षक से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है।
लोहरदगा में चार माह में 18 बच्चों की मौत
लोहरदगा सदर अस्पताल में विगत चार माह के दौरान 18 नवजात शिशु की मौत हुई है। जिसमें प्रसव के दौरान 8 बच्चे मृत पैदा हुए थे, जबकि 10 बच्चे जन्म के तुरंत बाद मर गए। बच्चों के मृत पैदा होने का कारण प्रसव समय पूर्व बच्चे का जन्म और जन्म के बाद के मामलों में मौत का कारण ज्यादातर मामलों में कमजोर और अविकसित बच्चों का जन्म है।
हजारीबाग में चार माह में पांच बच्चों की मौत
हजारीबाग सदर अस्पताल में पांच नवजातों बच्चों की मौत हुई है। इनमें सभी मामले समय पूर्व प्रसव व कुपोषण से जुड़े हुए हैं।
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