यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 28, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कोयले की गड़बड़ी मापने गई विजिलेंस टीम को उठा लेने की धमकी
कोयले की गड़बड़ी मापने गई विजिलेंस टीम को उठा लेने की धमकी देने का मामला सामने आया है।

आशीष अंबष्ठ, धनबाद। बीसीसीएल में कोयले के स्टॉक शॉर्टेज का खेल पुराना है। प्रबंधन व आउटसोर्सिंग कंपनी की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के कोयले का वारा-न्यारा हो जाता है। ताजा मामला धनबाद के भौंरा का है। वहां लाखों रुपये के कोयले की हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। स्टॉक रजिस्टर में दो हजार टन स्टील ग्रेड कोयला दर्ज था। लेकिन जमीनी जांच के लिए जब विजिलेंस टीम पिछले शनिवार को भौंरा गई तो वहां स्टील ग्रेड कोयला ही नहीं मिला।
विजिलेंस टीम को प्रबंधन ने वाशरी ग्रेड के कोयले की नापी करा दी, जिसकी कीमत स्टील ग्रेड की तुलना में कम होती है। कोयले की मात्रा भी काफी कम पाई गई। टीम के आपत्ति जताने पर आउटसोर्सिग कंपनी के गुर्गे ने उठा लेने की धमकी दी है। यह धमकी भौंरा के निकट लोदना में दी गई।
गुर्गे ने कहा कि मामले को रफादफा कर लो नहीं तो बहुत बुरा होगा। विजिलेंस अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की है। मामले को लेकर थाने में शिकायत नहीं की गई है। जांच टीम में गए अधिकारियों में संजय सिंह, संजय सान्याल व पार्थो मुखर्जी शामिल थे।
रजिस्टर में 2000 टन, मिला 35 टन
बताते हैं कि भौरा में गत दिसम्बर में दो हजार टन स्टील ग्रेड कोयले का उत्पादन हुआ था। परंतु किसी कारण कोयले का डिस्पैच नहीं हो सका। लेकिन जब कोलियरी स्तर पर सर्वे टीम ने एक सितंबर को नापी की तो वहां सिर्फ 35 टन स्टील ग्रेड कोयला मिला। यानी 98 फीसद कोयले का शॉर्टेज मिला। इसकी शिकायत विजिलेंस विभाग के पहुंच गई।
जब विजिलेंस टीम ने जांच की तो पाया कि सर्वे टीम की रिपोर्ट में दर्ज 35 टन को व्हाइटनर लगाकर उसे 1958 टन बना दिया गया है। इसे सही ठहराने के लिए प्रबंधन ने वाशरी ग्रेड को स्टील ग्रेड बताकर कोयले की नापी कराई। मगर वाशरी ग्रेड का भी कोयला भी सिर्फ 756 टन कोयला मिला। विजिलेंस मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है।
