यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 01, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पांच सौ करोड़ कर्ज लेकर वेतन देगी सरकार
राज्य सरकार ने सितंबर में ही 700 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। जुलाई से लेकर अब तक राज्य सरकार 2,800 करोड़ रुपये का कर्ज उठा चुकी है।

शिमला, राज्य ब्यूरो। सरकार के समक्ष कर्मचारियों को वेतन देने का संकट खड़ा हो गया है। हालत यह है कि सरकार के सामने कर्ज लेने के सिवाय दूसरा विकल्प नहीं रह गया है। वेतन के भुगतान के लिए सरकार अब 500 करोड़ रुपये का कर्ज लेगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में कर्ज देने की नीलामी पांच दिसबंर को होगी। राज्य सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है। इस वित्त वर्ष में राज्य सरकार 3,200 करोड़ रुपये का कर्ज उठा सकती है। सरकार तय सीमा तक कर्ज उठाने की धनराशि का आंकड़ा पूरा कर चुकी है।
वित्तीय संकट से जूझ रही प्रदेश सरकार को 15 दिन के भीतर ही 500 करोड़ का कर्ज लेने के लिए बाध्य होना पड़ा है। 21 नवंबर को सरकार ने आरबीआइ से 300 करोड़ रुपये का कर्ज उठाया था। इस ऋण को 10 साल की अवधि के लिए उठाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि सीमित वित्तीय संसाधनों के चलते सरकार को वेतन व पेंशन की अदायगी के लिए थोड़े समय के भीतर कर्ज उठाने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। इसके लिए वित्त विभाग कई दिन से लगातार रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा था।
राज्य सरकार ने सितंबर में ही 700 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। जुलाई से लेकर अब तक राज्य सरकार 2,800 करोड़ रुपये का कर्ज उठा चुकी है। राज्य में कर्मचारियों व पेंशनरों की वित्तीय अदायगी लगातार बढ़ रही है। इस कारण अब तक करीब 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है। सरकार आय-व्यय के अंतर की खाई को पाटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से लगातार ऋण से राशि को जुटा रही है। वित्त विभाग ने कर्ज लेने संबंधी जानकारी वेबसाइट पर जारी की है। अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी का कहना है कि सरकार कर्ज निर्धारित मापदंडों के तहत ही प्राप्त कर रही है। कर्ज के लिए केंद्र सरकार ने सीमा तय की है, जिसके दायरे में रहकर प्रदेश सरकार कर्ज ले रही है।