यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 06, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कैसे झोंक पाओगे एमसीआइ की आंखों में धूल
राज्य ब्यूरो शिमला : प्रदेश के मेडिकल कॉलेज डॉक्टरों की तैनाती के मामले में अब मेडिकल काउंसिल ऑफ

राज्य ब्यूरो शिमला : प्रदेश के मेडिकल कॉलेज डॉक्टरों की तैनाती के मामले में अब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) की नजरों में धूल नहीं झोंक पाएंगे। मेडिकल कॉलेजों में तैनात डॉक्टरों को दो बार यानी सुबह और शाम को बायोमीट्रिक मशीन पर हाजिरी लगानी होगी, जो एमसीआइ के कार्यलय के साथ ऑनलाइन जुड़ी होगी। इस संबंध में एमसीआइ ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके बाद प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को एमसीआइ के साथ ऑनलाइन जोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है।
दो बार हाजिरी लगने का सिस्टम शुरू होने के बाद उन डॉक्टरों पर लगाम लगेगी जो सुबह हाजिरी लगाने के बाद दोपहर को ही अस्पताल से निकल जाते हैं। इसके अलावा एमसीआइ को ऑनलाइन मेडिकल कॉलेज में तैनात प्रोफेसरों और सहायक प्रोफेसरों की पूरी जानकारी भी बतानी होगी। फिलहाल इन आदेश के बाद आइजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज में हाथ से हाजिरी लगाकर रिकार्ड वेबसाइट पर डाला जा रहा है। एमसीआइ के इन निर्देश के बाद से प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की दिक्कतें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।
ऐसे झोंक रहे थे आंखों में धूल
बताया जाता है कि आइजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज में सीटों को बढ़ाने के लिए एमसीआइ के दौरे के दौरान जिला अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों को कुछ समय के लिए मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। टीम के निरीक्षण करने के बाद इन विशेषज्ञ डॉक्टरों को दोबारा से अस्पतालों भेज दिया जाता है। टांडा मेडिकल कॉलेज और आइजीएमसी दोनों में एमसीआइ के निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों को बाहर से बुलाकर तैनात किया था। अब इस पर नजर रखने के लिए एमसीआइ ने कॉलेजों को ऑनलाइन जोड़ने का कदम उठाया है।
नए कॉलेजों को पेश आई दिक्कत
नए खुले मेडिकल कॉलेजों में प्रदेश सरकार को कई दिक्कतें पेश आ सकती हैं। इन कॉलेजों में वर्तमान में ही डॉक्टरों के पद भरने के लिए प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। ऐसे में यदि किसी तरह प्रदेश सरकार इन कॉलेजों को शुरू कर देती तो आने वाले समय में इनमें एमबीबीएस की सीटों को बढ़ा पाना टेड़ी खीर साबित होगा।
एमसीआइ के साथ आइजीएमसी को ऑनलाइन जोड़ने का काम चला हुआ है। अब डॉक्टरों को सुबह और शाम को हाजिरी लगानी पड़ेगी, जिसकी रोज की जानकारी एमसीआइ को रहेगी।
डॉ. रमेश चंद, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आइजीएमसी