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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जूरी गांव में जुगाड़ के पुल पर जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं लोग

By Babita KashyapEdited By:
Published: Thu, 04 May 2017 01:36 PM (IST)Updated: Thu, 04 May 2017 01:41 PM (IST)

जूरी गांव में पुल न होने से विकट परिस्थितियों में जी रहे लोग, यहां मूलभूत सुविधाएं देने में प्रशासन व पंचायत के हाथ तंग दिखते हैं।

जूरी गांव में जुगाड़ के पुल पर जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं लोग
जूरी गांव में जुगाड़ के पुल पर जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं लोग

तीसा, शकूर अहमद। जिला के दुर्गम इलाकों में लोग विकट परिस्थितियों में जीने को मजबूर हैं। सुविधाएं तो इन इलाकों को छू भी नहीं पाई हैं। उपमंडल तीसा की ग्राम पंचायत चरड़ा का जूरी गांव तो इसका जीता जागता उदाहरण है, जहां मूलभूत सुविधाएं देने में प्रशासन व पंचायत के हाथ तंग दिखते हैं। 

आलम यह है कि पुल के अभाव में जूरी गांव केग्रामीण जुगाड़ की व्यवस्था से चौबू नाला पार कर रहे हैं। पुल न बनता देखकर ग्रामीणों दो पेड़ों को काटकर उस पर कुछ तख्ते लगाकर इसे नाले के आर-पार कर दिया है। मजबूरी यह भी कि बरसात में उफान मारते नाले को भी इस व्यवस्था के सहारे जान जोखिम में डालकर ग्रामीण पार करते हैं।

तीसा उपमंडल की चरड़ा पंचायत ने जूरी गांव के लिए करीब पांच वर्ष पहले एक लकड़ी का पुल बनाया था। यह पुल अब जर्जर हो चुका है। इसलिए ग्रामीण इस पुल से नाला पार करने का जोखिम नहीं उठाते हैं। ग्रामीण फकरदीन, गुलाम रसूल, हुसैन मोहम्मद, मीर हमजा, शेर मोहम्मद, रुस्तम, रोशन, राजबलि, सवारदीन, इस्माल खान, रोशनदीन ने बताया कि चरड़ा पंचायत में उनके गांव सहित मोहरा व गवाड़ी भी आते हैं। इन तीनों गांव में करीब 75 परिवार रहते हैं। उन्होंने पंचायत के समक्ष इस मुद्दे को उठाया था लेकिन कुछ नहीं हुआ। ऐसे में जूरी नाले पर अपने स्तर पर दो पेड़ काटकर अस्थायी पुल का निर्माण कर दिया। इससे भी नाला पार करने में जोखिम है। इसी पुल को पार करके गांव के करीब 35 बच्चे चरड़ा स्कूल तक पहुंचते हैं।

हैरत है कि पूरे मामले से अवगत होने पर भी पंचायत पुल का निर्माण नहीं कर पाई है। नए पुल के निर्माण के लिए पंचायत प्रतिनिधियों से लगाई गुहार भी बेकार ही गई। उनके गांव की आबादी 1200 के करीब है। चरड़ा पंचायत तक पहुंचना उनके लिए जोखिम से कम नहीं है। इस रास्ते से चरड़ा पहुंचने के लिए बहुत कम समय लगता है। यदि अन्य रास्ते से चरड़ा पहुंचना पड़े तो करीब एक घंटा लगता है।

बरसात में उफान मारते नाले को पार करने में जान का जोखिम मामला ध्यान में आया है। वह जल्द पंचायत से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी लेंगे। अगर नाले पर पुल नहीं बना है तो प्रशासन इसके लिए धन का प्रावधान करेगा।

सुदेश मोख्टा, उपायुक्त चंबा।

सात वर्ष पूर्व जूरी गांव के चौबू नाला पर लकड़ी का पुल बनाया गया था। यह पुल जर्जर हालत हो चुका है। पंचायत ने एक प्रस्ताव पारित कर उपायुक्त चंबा को भेजा है। पैस मिलते ही पुल का काम शुरू करवा दिया जाएगा।

नूरबानो, प्रधान, ग्राम पंचायत चरड़ा

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