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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 01, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भाजपा सांसद सैनी ने अब मोदी के नीति आयोग पर उठाए सवाल

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Fri, 01 Apr 2016 10:36 PM (IST)Updated: Sat, 02 Apr 2016 09:32 AM (IST)

कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गठित नी‍ति आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्‍होेंने कहा ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। भाजपा सांसद राजकुमार सैनी का विवादों से जैसे चोली-दामने सा नाता हो गया है। जाट आरक्षण पर हरियाणा सरकार पर हमला करने के बाद अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने अब केंद्रीय योजना आयोग की जगह नीति आयोग के गठन पर सवाल उठा दिए हैं। सांसद ने कहा कि नीति आयोग में बैठे अधिकारी केवल किताबी ज्ञान रखते हैं उन्हें धरातल का कोई ज्ञान नहीं है। इसके कारण देश का किसान व मजदूर गरीब से गरीब होते जा रहे हैं। जाट आरक्षण पर मुखर रहे सांसद ने कहा कि उन्हें न्यायापालिका पर पूर्ण विश्वास है।

कहा, आयोग के सदस्यों को नहीं मालूम धरातल की स्थिति

शुक्रवार को अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत में राजकुमार सैनी ने कहा कि वह बृहस्पतिवार को दिल्ली में उद्योग संबंधित संसदीय समिति की बैठक में शामिल हुए। नीति आयोग के सदस्य भी बैठक में थे। किसानों को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने पांच सुझाव भी दिए।

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उन्होंने बताया कि किसानों पर राजनीति के सिवाए कुछ नहीं हो रहा है। केवल कागजों पर योजनाएं बनती हैं और किसानों तक उनकी सही तो क्या पूरी जानकारी भी नहीं पहुंच पाती। कृषि घाटे का सौदा बन रही है किसान कर्ज के बोझ तले दब रहे और कृषि से मुंह मोड़ रहे है जिसका कारण है कि बंपर पैदावार पर तो माल दो रुपये किलो और कम पैदावार पर लागत मिलने कीमत से भी ज्यादा होना है।

सैनी ने कहा कि एक मजबूत और अच्छी कृषि नीति बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पांच एकड़ तक के किसानों के कार्य को मनरेगा से जोड़ा जाए। इससे स्कीम का फर्जीवाड़ा खत्म होगा और गांव में ही रोजगार मिलेगा।

अच्छी कृषि नीति बनाने की जरूरत

सैनी ने कहा कि किसानों की माली हालत सुधारने के लिए अच्छी कृषि नीति बनाने की जरूरत है। सबसे पहले तो किस क्षेत्र के किसान के यहां किस फसल का कितना उत्पादन होता है इसकी समीक्षा करने के बाद सरकार किसान के साथ अनुबंध करे कि आपका माल सरकार इस भाव पर इतनी मात्रा में खरीदेगी और किसान को निर्देश दिए जाएं कि आप केवल उतना ही उत्पादन करें जितना सरकार आपसे खरीद करेगी।

सैनी ने कहा कि सरकार की फसल के भाव पहले से ही निर्धारित होने चाहिए। कृषि क्षेत्र से जुड़े लघु उद्योगों को एमएसएमई स्कीम के साथ जोड़कर किसान और गरीब तबके को लाभ पहुंचाया जा सकता है। रात की बजाय दिन में बिजली मिलनी चाहिए। सैनी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में रात को कार्य नहीं हो सकता, जबकि उद्योग में रात को भी काम हो सकता है। किसानों की तीन गुना कीमती जमीन पर उन्हे महंगा कर्ज दिया जाता है।