यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 30, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हुडा को देना होगा हिसाब

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद :
एक ओर जहां किसानों के विरोध के चलते हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ग्रेटर फरीदाबाद (ग्रेफ) में विकास कार्य शुरू नहीं करा पा रहा है, वहीं दूसरी ओर बाहरी विकास शुल्क (इडीसी) को लेकर हुडा घिरता नजर आ रहा है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा पूछे गए सवालों ने हुडा प्रशासन की मुसीबतें बढ़ा दी हैं।
ग्रेटर फरीदाबाद वेलफेयर एसोसिएशन, फरीदाबाद की ओर से दायर एक याचिका में सुनवाई के दौरान हुडा, फरीदाबाद की ओर से एक शपथ पत्र दायर किया गया था, जिसमें ग्रेटर फरीदाबाद में विकास परियोजनाएं 2016 तक पूरा होने की बात कही गई थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इस शपथ पत्र को खारिज कर 21 अप्रैल को एक अंतरिम आदेश जारी किया है, जिसमें नए सिरे से शपथ पत्र जमा कराने को कहा है।
उच्च न्यायालय ने हुडा प्रशासक से कहा है कि वह अपने शपथ पत्र में बताए कि 31 मार्च 2014 तक कितना इडीसी वसूला गया है? इसमें से कितना पैसा किस काम पर खर्च किया गया है? बाहरी विकास का काम कितने समय में कब तक पूरा किया जाएगा? एक निर्धारित समय सीमा से अवगत कराया जाए। अदालत ने हुडा के मुख्य प्रशासक से इस तरह की जानकारी दूसरे शहरी क्षेत्रों के बारे में भी देने को कहा है।
दिलचस्प यह है कि ग्रेटर फरीदाबाद में कालोनाइजरों ने जब लाइसेंस लिया था तो उस समय कालोनी के अंदर का विकास की जिम्मेवारी तो कालोनाइजर की ही थी, लेकिन बाहरी विकास जैसे पानी-सीवर-सड़क आदि की जिम्मेवारी हुडा ने ली थी, लेकिन कोई समय सीमा तय नहीं की थी। बल्कि कालोनाइजर से यह लिखवा लिया था कि जब तक हुडा बाहरी विकास नहीं करता, तब तक कालोनाइजर ही पानी-सीवर का इंतजाम करेगा।
अब कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद हुडा को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह कितने समय में बाहरी विकास का काम पूरा कर देगा। इतना ही नहीं, अब हुडा या हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कारपोरेशन (एचएसआइआइडीसी) को यह भी बताना होगा कि गैर लाइसेंसी इलाके में वह बाहरी विकास पर कितना पैसा करने वाला है।
जानकार मानते हैं कि इससे ग्रेटर फरीदाबाद के विकास के मामले में हुडा की जिम्मेवारी बढ़ेगी और ग्रेटर फरीदाबाद में विकास कार्य में तेजी आएगी। वहीं फ्लैट खरीद चुके लोगों पर बढ़ाई गई ईडीसी की मार भी कम होगी, क्योंकि हुडा को वूसली गई ईडीसी का पूरा ब्योरा पेश करना होगा।
विशेषज्ञ कर रहे हैं पड़ताल : दहिया
उच्च न्यायालय ने जो भी अंतरिम आदेश दिया है, हमारे विधि विशेषज्ञ उसकी पड़ताल कर रहे हैं और अगली तारीख से हमारी ओर से शपथ पत्र उच्च न्यायालय में दायर कर दिया जाएगा।
-सुप्रभा दहिया, प्रशासक हुडा
---------------
हर वर्ग को होगा फायदा : गुप्ता
उच्च न्यायालय के इस अंतरिम आदेश से हर वर्ग को फायदा होगा। हम लोग भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द बाहरी विकास हो और लोग अपने-अपने फ्लैट में जाकर रहें।
- राकेश गुप्ता, प्रबंध निदेशक
आरपीएस गु्रप।