सिनेमा के 100 साल

  • कान फिल्म समारोह में होगा बांबे टाकीज का प्रीमियर

    Updated on: Fri, 03 May 2013 01:52 PM (IST)

    मुंबई। कान फिल्म समारोह ने आधिकारिक सूचना दी है कि इस साल के समारोह में भारत की बांबे टाकीज फिल्म का प्रीमियर होगा। निर्माण के समय से चर्चा में आ चुकी बांबे टाकीज चार चर्चित निर्देशकों का संयुक्त प्रयास है।  और पढ़ें »

  • बॉम्बे टॉकीज फिल्म अमिताभ के नाम..

    Updated on: Fri, 03 May 2013 01:52 PM (IST)

    बॉम्बे टॉकीज फिल्म खूब चर्चा में है। यह फिल्म हिंदी सिनेमा के सौ सालों पर आधारित है। वैसे भी हिंदी सिनेमा बिना बॉलीवुड शहंशाह अमिताभ बच्चन के अधूरी है। हिंदी सिनेमा का जिक्र हो और अमिताभ बच्चन की बात न हो ऐसा कैसे हो सकता है। इस फिल्म निर्देशकों- दि...  और पढ़ें »

  • सिनेमा के सौ साल पर याद करते हैं रेखा-अभिताभ का प्यार

    Updated on: Fri, 03 May 2013 01:40 PM (IST)

    अमिताभ और जया भादुड़ी की शादी 1 और पढ़ें »

  • सिनेमा के सौ साल में कैसा रहा प्राण का सफर

    Updated on: Fri, 03 May 2013 01:17 PM (IST)

    प्राण याद है? विलेन, कैरेक्टर आर्टिस्ट, छोटे से रोल में भी जान फूंक देने वाले। अमूमन गॉसिप मैग्जींस में हेडलाइंस बनने वालों के पीछे गुम हो जाने वाले कुछ नामों में से एक है ये नाम। और पढ़ें »

  • कई उतार-चढ़ावों से गुजरा आज का सिनेमा

    Updated on: Wed, 19 Dec 2012 03:33 PM (IST)

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  • अब शुद्ध बिजनेस है बॉलीवुड

    Updated on: Wed, 19 Dec 2012 03:05 PM (IST)

    इन दिनों फिल्मों की गुणवत्ता की चर्चा कम ही होती है। नतीजतन ज्यादा बिजनेस के लिए तौर-तरीके बदले जा रहे हैं। कोशिश की जा रही है कि वीकएंड के तीन दिनों में ही अधिकतम कमाई से बॉक्स ऑफिस को झंकृत कर दिया जाए। यह भी देखने में आ रहा है कि दर्शक उन फिल्मों ...  और पढ़ें »

  • घटे रेट में देखी गई फिल्में

    Updated on: Sun, 09 Sep 2012 11:27 AM (IST)

    काश की पहली बोलती फिल्म आलमआरा दर्शकों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आई थी, लेकिन यह खबर कुछ लोगों के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। दरअसल, यह मूक फिल्मों के निर्माता थे। उन्हें लग रहा था कि बोलती फिल्में आने के बाद उनकी बनाई मूक फिल्मों को भला कोई क्यो...  और पढ़ें »

  • बॉलीवुड में बनारसी रंग

    Updated on: Sun, 09 Sep 2012 11:24 AM (IST)

    जब हिंदी सिनेमा का शैशव विस्तार ले रहा था। यह बोलती और मूक फिल्मों का संधिकाल था। कहीं से काशी आ बसे गरम दुशाले के एक व्यापारी के बेटे ने हिंदी सिनेमा के इतिहास की छाती पर काशी की ओर से दर्ज कराया एक नाम.. आगा हशर कश्मीरी।  और पढ़ें »

  • भागलपुर के दादामुनि

    Updated on: Mon, 03 Sep 2012 01:11 PM (IST)

    हिंदी फिल्मों के विकास में अतुल्य योगदान देने वाले स्व. अशोककुमार -जिन्हें दादामुनि भी कहा जाता था- जब छात्र थे, तो हर वर्ष अपने भाई-बहनों के साथ गर्मी की छुट्टियां नाना सतीशचंद्र बनर्जी के भागलपुर स्थित राजबाटी हवेली में ही बिताते थे।  और पढ़ें »

  • मूक युग की मल्लिकाएं

    Updated on: Mon, 03 Sep 2012 12:58 PM (IST)

    भारतीय सिनेमा के शुरुआती दो दशक यानी 1913 से लेकर 1930 के बीच फिल्में तो खूब बनीं, लेकिन फिल्मों में महिला कलाकारों को लाना बड़ा ही मुश्किल काम था।  और पढ़ें »

  • ..हमें भी वह गाना सुनाओ

    Updated on: Thu, 30 Aug 2012 01:05 PM (IST)

    एक बार फिर स्कूल बदलने की बात आई। मैंने सातवीं कक्षा में एंग्लो संस्कृत विक्टोरिया जुबली हाईस्कूल, दरियागंज में दाखिला लिया। उम्र जैसे-जैसे बढ़ती गई, मैं भी बड़ा होता गया, साथ ही गाने का शौक भी परवान चढ़ता गया। इन सबके अलावा मोहल्ले की रंगीनियत का भी...  और पढ़ें »

  • सुरों का भी सरताज है

    Updated on: Tue, 28 Aug 2012 10:43 AM (IST)

    द्दिपुरा के राजकुमार सचिन देव बर्मन का नाम तो सुना ही होगा। न सुना हो, तो बता दें कि एसडी बर्मन के नाम से इसी राजकुमार ने करीब 100 हिंदी फिल्मों में झूमाने वाला संगीत दिया। दर्जनों गीतकार और गायक-गायिका भी देकर गए।  और पढ़ें »

  • अलविदा इमाम साहब

    Updated on: Mon, 27 Aug 2012 04:04 PM (IST)

    चरित्र अभिनेता के रूप में सर्वाधिक चर्चा पाने वाले कलाकार थे ए के हंगल। उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में वैसे तो लगभग सवा दो सौ फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें से कुछ भूमिकाएं तो पूरी फिल्म में छाई हुई थीं, लेकिन फिल्म शोले में निभाई उनकी नेत्रहीन ...  और पढ़ें »

  • 50 की उम्र में पहली फिल्म

    Updated on: Mon, 27 Aug 2012 03:58 PM (IST)

    एके हंगल को पहली बार फिल्मों में अभिनय करने का अवसर मिला पचास की उम्र में 1966 में बासु भट्टाचार्य निर्देशित फिल्म तीसरी कसम में। यह फिल्म 1967 में रिलीज हुई। इसमें उनकी भूमिका हीरामन यानी राजकपूर के भाई की थी।  और पढ़ें »

  • नहीं भूलती वे बातें

    Updated on: Mon, 27 Aug 2012 03:53 PM (IST)

    हंगल साहब आज दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वे जब तक जीवित रहे, कुछ बातों को कभी नहीं भुला सके। पेश हैं वे बातें, उन्हीं की जुबानी.. मेरा जन्मदिन : एक बार फिल्मी पत्रिका के संपादक ने मेरा साक्षात्कार लिया था। मुझसे विदा लेने से पहले उसने पूछा, एक आखिरी ...  और पढ़ें »

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