यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 16, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'नया दौर' का ड्रामा
पांचवें दशक से पहले दिलीप कुमार का फिल्मी करियर और असल जिंदगी का रोमांस मधुबाला के नाम रहा। उसके बाद ...और पढ़ें

मुंबई। पांचवें दशक से पहले दिलीप कुमार का फिल्मी करियर और असल जिंदगी का रोमांस मधुबाला के नाम रहा। उसके बाद उनकी ऑनस्क्रीन जोड़ी वैजयंतीमाला के साथ चर्चित रही। दोनों ने बतौर जोड़ी सात कल्ट फिल्में कीं। 'नया दौर' इस जोड़ी के अलावा दूसरी वजहों के चलते भी चर्चा में रही। फिल्म की कहानी पारंपरिक हीरो-हीरोइन और इनकी लव स्टोरी जैसी नहीं थी। वह नए-नवेले आजाद हुए हिंदुस्तान में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने पर आधारित थी। नतीजतन कोई फिल्मकार उसमें हाथ नहीं लगाना चाहता था। हर किसी को वह महज डॉक्यूमेंट्री स्तर की कहानी लगती थी। वह फिल्म इंडस्ट्री में विभिन्न फिल्मकारों के पास चक्कर लगाती रही। तब तक, जब तक कि अख्तर मिर्जा ने बीआर चोपड़ा को उसे नैरेट नहीं किया। चोपड़ा साहब को भी वह कहानी पसंद इसलिए आई, क्योंकि वे खुद एक समय में पत्रकार रह चुके थे और वे फिल्म के सोशल मैसेज से खुद को कनेक्ट कर सके। फिल्म का मैसेज था भी कमाल का कि 'प्रगति हर हाल में स्वीकारी जानी चाहिए, जब तक कि उससे मानवता को नुकसान न पहुंचे।'
कहानी सुनने के दौरान ही चोपड़ा साहब ने दिलीप कुमार और मधुबाला को मेन लीड में कास्ट करना तय कर लिया था, लेकिन दिलीप कुमार ने काम करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वह कहानी महबूब खान उन्हें पहले ही सुना चुके थे, जो उन्हें पसंद नहीं आई थी, लेकिन बीआर चोपड़ा घबराए नहीं। उन्होंने फिल्म की पूरी स्क्रिप्ट और संवाद के साथ दिलीप कुमार को अप्रोच किया। दिलीप कुमार ने पूरे चार घंटे पूरी स्क्रिप्ट सुनी और फिल्म के लिए हामी भर दी। उन्हें तब कहानी इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने उसी वक्त फिल्म साइन भी कर ली। उस वक्त तक दिलीप कुमार और मधुबाला के रिश्तों में खटास आ चुकी थी, पर दोनों में तब भी इतनी करीबी थी कि फिल्म को लेकर उनके बीच टकराव के आसार नहीं थे। मधुबाला ने फिल्म साइन की, लेकिन आगे एक ट्विस्ट सबका इंतजार कर रहा था।
चोपड़ा साहब उस फिल्म को रियल लोकेशन पर शूट करना चाहते थे, क्योंकि फिल्म की कहानी भोपाल के एक गांव में सेट थी। फिल्म से जुड़ी यूनिट ने मुंबई के आसपास लोकेशन ढूंढ़ने का काम शुरू कर दिया, पर वे लोकेशन उन्हें संतुष्ट नहीं कर पा रहे थे। आखिर में भोपाल से 250 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव बुधनी में लोगों को मनमाफिक लोकेशन मिली। बीआर चोपड़ा अपनी पूरी यूनिट के साथ वहां की रवानगी की तैयारी में लगे, लेकिन उन दिनों मधुबाला का काम देखने वाले अताउल्ला खान ने इसके लिए ना कह दिया। उसकी वजह मधुबाला की नासाज तबीयत और उनके अब्बाजान थे। उनके अब्बा नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी दिलीप कुमार की किसी फिल्म में आउटडोर लोकेशन पर शूट करे। अपवाद में मात्र एक उदाहरण थी शक्ति सामंत की 'इंसान जाग उठा'। चोपड़ा साहब अपनी फिल्म को भी अपवाद स्वरूप क्यों मान बैठे थे, वह गुत्थी अब तक नहीं खुली। अताउल्ला खान ने साफ शब्दों में कह दिया कि अगर वे मुंबई के आसपास कहीं शूट करना चाहें, तो बात बन सकती है। चोपड़ा साहब नहीं माने। उन्हीं दिनों दिलीप कुमार बिमल रॉय की 'मधुमती' शूट कर रहे थे। उसमें उनके अपोजिट वैजयंतीमाला थीं। दोनों की केमिस्ट्री भी सबको भा रही थी। बीआर चोपड़ा ने मधुबाला की ना के प्रत्युत्तर में उनकी जगह वैजयंतीमाला को कास्ट कर लिया। नाराजगी में उन्होंने उस वक्त की चर्चित ट्रेड मैगजीन में एक विज्ञापन भी निकलवाया। उसके तहत 'नया दौर' में लीड पेयर के रूप में दिलीप कुमार और वैजयंती माला का नाम था। मधुबाला का नाम नदारद। प्रतिक्रिया यह हुई कि मधुबाला ने उस विज्ञापन के अगले ही दिन उसी मैगजीन में अपनी फिल्मों की फेहरिस्त प्रकाशित करवाई। उनमें 'नया दौर' का नाम नहीं था।
मामला यहीं नहीं थमा। नाराज अताउल्ला खान कोर्ट चले गए। उन्होंने बी. आर. चोपड़ा पर मामूली वजहों के चलते फिल्म से निकालने का मामला दर्ज कर दिया। उनका तर्क था कि फिल्म बड़ी आसानी से मुंबई व आसपास के इलाकों में शूट हो सकती थी। उसके जवाब में बी. आर. चोपड़ा ने मधुबाला पर क्रिमिनल केस दर्ज कराया। यह कहते हुए कि मधुबाला उनकी साइनिंग अमाउंट वापस कर दें। मामला तूल पकड़ा। मजिस्ट्रेट आर. एस. पारेख की अगुवाई में कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई में दोनों पक्ष थे। मधुबाला भी थीं और दिलीप कुमार भी आए। दिलीप कुमार ने सबके सामने मधुबाला की ओर इशारा करते हुए कहा कि मैं इस शख्स से प्यार करता हूं और मरते दम तक करता रहूंगा। आखिर में हिंदी फिल्मों की तरह मामले की हैप्पी एंडिंग हुई। बी. आर. चोपड़ा ने एक भद्र पुरुष की तरह मधुबाला के खिलाफ केस वापस लिया। बाद में बी. आर. चोपड़ा 300 लोगों की यूनिट के साथ बुधनी गांव गए और 'नया दौर' शूट की, लेकिन मधुबाला के बगैर..।
(क्रमश:)
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