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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 16, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मंत्री सिद्धू के कई हैैं रंग, क्रिकेट व टीवी से होकर राजनीति में छाए

By Kamlesh BhattEdited By:
Published: Thu, 16 Mar 2017 12:43 PM (IST)Updated: Thu, 16 Mar 2017 07:58 PM (IST)

क्रिकेट से राजनीति में कदम रखने वाले नवजोत सिंह सिद्धू जहां गए सफलता के झंडे गाड़े। आज उन्होंने पंजाब में मंत्री पद की शपथ ली है।

मंत्री सिद्धू के कई हैैं रंग, क्रिकेट व टीवी से होकर राजनीति में छाए
मंत्री सिद्धू के कई हैैं रंग, क्रिकेट व टीवी से होकर राजनीति में छाए

जेएनएन, चंडीगढ़। कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ कैबिनेट मंत्री की शपथ लेने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने क्रिकेट में भी सफल पारी खेली। इसके अलावा वह छोटे पर्दे पर भी सफल कलाकार हैैं। 20 अक्टूबर 1963 को पटियाला में जन्मे सिद्धू 1983 से 1999 तक क्रिकेट के मंजे हुए खिलाड़ी रहे। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और तीन बार अमृतसर से सांसद बने। 2014 में उन्हें पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया तो उनकी भाजपा से दूरी बनने लगी। हालांकि पार्टी ने उन्हें राज्यसभा पहुंचाया, लेकिन उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया और अमृतसर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की।

सिद्धू ने 1983 से लेकर 1999 तक पूरे सत्रह साल क्रिकेट खेला। क्रिकेट में भी उनके नाम कई उपलब्धियां हैैं। 1987 के विश्व कप क्रिकेट में वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उन्होंने पांच में से चार मैच खेले और प्रत्येक मैच में अर्धशतक ठोका। पाकिस्तान के खिलाफ़ शारजाह में खेलते हुए 1989 में उन्होंने पहला शतक लगाया।

सिद्धू ने तीन बार 1993, 1994 और 1997 के दौरान प्रति वर्ष 500-500 से अधिक टेस्ट रन बनाए। प्रथम श्रेणी मैच में मात्र 104 गेंदें खेलकर बनाए गए 286 रन उनके जीवन का सर्वश्रेष्ठ स्कोर है। 1994 में वेस्टइंडीज दौरे के दौरान उन्होंने एकदिवसीय मैचों में 884 रन बनाए और पांच शतक ठोकने वाले पहले भारतीय होने का गौरव भी प्राप्त किया।

सिद्धू ने इसके बाद राजनीति में कदम रखा। उन्होंने अमृतसर से 2004 में लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने राजनीति में पीछे मुड़कर नहीं देखा। राजनीति में आने से पहले 1988 में सिद्धू को गुरनाम सिंह की इरादतन हत्या के सिलसिले में सह-आरोपी बनाया गया था। सांसद बनने के बाद मामले में सिद्धू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

दिसंबर 2006 में सिद्धू पर अदालत में मुकदमा चला। उन्हें तीन साल कैद की सजा सुनाई गई। इसके कारण सिद्धू ने जनवरी 2007 में सांसद पद त्याग दिया। हालांकि बाद में उच्चतम न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा पर रोक लगाते हुए फरवरी 2007 में सिद्धू को अमृतसर लोकसभा सीट से दोबारा चुनाव लडऩे की इजाजत दे दी। उपचुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की। सिद्धू ने 2009 के फिर लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

अमृतसर से तीन बार जीतने के बावजूद 2014 में उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं दिया गया। इस सीट से अरुण जेटली को टिकट दिया गया। जेटली को चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। सिद्धू तब से भी भाजपा से दूरी बनाने लगे थे। उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू हालांकि शिअद-भाजपा सरकार में सीपीएस रही, लेकिन सरकार में रहते हुए थी वह भी सरकार के खिलाफ उतर आई थी।

सिद्धू की नाराजगी को दूर करने के लिए भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया, लेकिन सिद्धू की नाराजगी दूर नहीं हुई। पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ माह पूर्व सिद्धू ने भाजपा छोड़ दी और काफी दिन की उहापोह के बाद कांग्रेस में शामिल हुए। कैप्टन ने उन्हें अमृतसर ईस्ट से विधानसभा का टिकट दिया। उन्होंने वहां से शानदार जीत करते हुए और कैप्टन के मंत्रिमंडल में स्थान बनाया है।

देखें तस्वीरें: नवजोत सिंह सिद्धू का क्रिकेट से मंत्री पद तक का सफर