यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 28, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पंजाब विस चुनाव के परिणाम तय करेंगे AAP की राजनीतिक राह
आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के रुख से यह तय हो गया है कि पंजाब विधानसभा चुनाव परिणाम से ही पार्टी की राजनीतिक दिशा तय होगी।

नई दिल्ली [नवीन गौतम]। पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि आम आदमी पार्टी (आप) उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश में चुनाव लड़ेगी या नहीं। पंजाब के नतीजे ही अन्य राज्यों में पार्टी के विस्तार की रणनीति और अर¨वद केजरीवाल के भविष्य को भी दिशा देंगे।
नतीजे अगर आप की उम्मीद के अनुरूप रहे तो भाजपा के विरोधी दलों के संघ मुक्त भारत अभियान के केंद्र में नीतीश कुमार संग अर¨वद केजरीवाल भी होंगे। पार्टी नेता मान रहे हैं कि जिन राज्यों में कदम बढ़ाने से पार्टी के रणनीतिकार अभी ठिठक रहे हैं वहां फिर पार्टी खुलकर मैदान में होगी।
नतीजे उम्मीदों के विपरीत रहे तो फिर फोकस गोवा और दिल्ली नगर निगम के चुनाव पर रहेगा। यही वजह है कि राष्ट्रीय परिषद एवं कार्यकारिणी के पुनर्गठन में जिस तरह की रणनीति अपनाई गई है, उससे पार्टी के रणनीतिकारों की सारी उम्मीदें पंजाब विधानसभा चुनाव पर ही टिकी हैं।
दिल्ली में बुधवार को हुई राष्ट्रीय परिषद की बैठक का एजेंडा तो राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पुनर्गठन का था, जिसका फैसला एक सप्ताह पहले ही कर लिया गया था। इसकी केवल बैठक में औपचारिकता पूरी करनी थी। करीब साढ़े सात घंटे चली बैठक का केंद्र बिंदु पंजाब एवं गोवा विधानसभा के चुनाव ही रहे।
अधिकांश नेताओं का कहना था कि पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे ही देश में पार्टी का विस्तार तय करेंगे। पंजाब की चुनावी चर्चा के बीच कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में चुनाव लड़े बिना पार्टी का विस्तार नहीं किया जा सकता है।
केंद्र से भाजपा को हटाने के लिए देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी पार्टी को चुनाव लड़ना चाहिए, जिसका फैसला जल्द हो ताकि उसके लिए तैयारी शुरू हो सके। इस पर कुछ सदस्यों ने तर्क दिया कि पार्टी को अभी बड़े राज्यों के बजाय छोटे राज्यों पर ही फोकस करना चाहिए। बड़े राज्यों के लिए अभी पार्टी के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
उन्होंने पंजाब के साथ ही गोवा और उसके बाद उत्तराखंड, हिमाचल एवं राजस्थान के लिए तैयारी शुरू करने पर जोर दिया। कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना था कि पार्टी देश के सभी राज्यों में चुनाव लड़े, लेकिन इसके लिए पहले पंजाब की जनता के निर्णय का इंतजार करना चाहिए। अभी पूरा फोकस पंजाब पर रखना चाहिए।
आप संयोजक अरविंंद केजरीवाल ने भी कहा कि चुनाव जरूर लड़ेंगे, लेकिन वहां फोकस करेंगे जहां सौ में से नब्बे सीटें जीतने के आसार हैं। आप के वरिष्ठ नेता एवं पंजाब के प्रभारी संजय सिंह ने कहा कि सभी राज्यों में हमारा संगठन मजबूत है और पंजाब के लोग जो फैसला करेंगे उसका देशभर में अच्छा संदेश जाएगा।
इसके बाद उचित फैसला हो जाएगा। पंजाब के बाद सर्वाधिक चर्चा गोवा को लेकर हुई। कुछ सदस्यों ने गोवा के बारे में भी जल्द फैसला लेने की बात कही, जिस पर वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें गोवा में अगले माह प्रस्तावित केजरीवाल की रैली तक इंतजार करने के लिए कहा।
