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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 14, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चिकनगुनिया किसी व्यक्ति को जीवन में दोबारा नहीं होता, पढ़ें और भी कई खास बातें

By JP YadavEdited By:
Published: Wed, 14 Sep 2016 09:28 AM (IST)Updated: Thu, 15 Sep 2016 08:16 AM (IST)

चिकनगुनिया एक बार हो जाने पर जीवन में दोबारा होने की संभावना लगभग न के बराबर होती है। यह बीमारी सीधे एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में नहीं फैलती है।

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नई दिल्ली (जेएनएन)। देश की राजधानी में चिकनगुनिया की बीमारी बेकाबू हो गई है। दिल्ली-एनसीआर में अब तक इसकी चपेट में करीब तीन हजार लोग आ चुके हैं, वहीं दिल्ली में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। आइये जानें क्या है चिकनगुनिया और इससे बचने के उपाय क्या हैं।

चिकनगुनिया

चिकनगुनिया शब्द अफ्रीकी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है वह जो झुका दे...। यह एक वायरल बुखार है, जो एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से इसका वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। सबसे पहले चिकनगुनिया की शुरुआत 1952 में अफ्रीका के मंकोडे द्वीप में हुई, जो तंजानिया और मोजाम्बिक के बीचोबीच स्थित है।

जानें महत्वपूर्ण बातें

- चिकनगुनिया एक बार हो जाने पर जीवन में दोबारा होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है
- यह बीमारी सीधे एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में नहीं फैलती
- एक बीमार व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद फिर स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलती है

चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए केंद्र हर तरह की मदद को तैयार: जेपी नड्डा

चिकनगुनिया के लक्षण

मच्छर काटने के 2 से 7 दिनों के बाद चिकनगुनिया के लक्षण नजर आते हैं। शरीर पर चकते निकलना, जी मिचलाना, भूख कम लगना, कमजोरी आना, बुखार, खांसी, जुकाम, बदन में दर्द और जोड़ों में दर्द होना।

व्यक्ति इतना कमजोर हो जाता है कि कोई भी कार्य करने में असमर्थ पाता है। आमतौर पर चिकनगुनिया बुखार जानलेवा नहीं कहा जाता, लेकिन लापरवाही बरती जाए तो कई मामलों में जानलेवा भी हो सकता है।

बचाव
आस-पास पानी जमा नहीं होने दें। रुके हुए पानी में मच्छर पनपते हैं। खुद को मच्छरों से बचाना बहुत जरूरी है। रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। शरीर को ढककर रखें ताकि मच्छरों से बचे रहें।

इलाज

-इसके विषाणु नष्ट करने के लिए कोई दवा या टीका अब तक नहीं बनी है
-जोड़ों व अन्य दर्द के लिए पेन किलर दवाएं दी जाती हैं
-बुखार आने पर बुखार कम करने की दवाएं दी जाती हैं
-आराम करना चाहिए और तरल पदार्थ खूब लेने चाहिए
-अगर कोई भी दवा लें तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें

यहां पर याद दिला दें कि देश की राजधानी दिल्ली में चिकनगुनिया से पांच मौतों की खबरों के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाजपा के बीच जुबानी जंग छिड़ी है। केजरीवाल ने पीएम मोदी व उपराज्यपाल नजीब जंग पर दिल्ली की बदहाली का ठीकरा फो़ड़ा। भाजपा ने इस पर पलटवार किया।

वहीं, मंगलवार सुबह केजरीवाल पत्रकार शेखर गुप्ता के एक ट्वीट से इतने बिफरे कि उन्हें चुनौती तक दे डाली। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस आपदा की घड़ी में केजरीवाल समेत आप सरकार के अधिकांश मंत्री दिल्ली से बाहर हैं। उधर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोगों से दहशत में नहीं आने की अपील की है।

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में तीन मरीजों की सोमवार को मौत हो गई, जिसकी पुष्टि मंगलवार को की गई कि उनकी चिकनगुनिया से मौत हुई थी। तीनों बुजुर्ग थे। इन्हें 11 सितंबर को आईसीयू में भर्ती किया गया था। एक अन्य बुजुर्ग की मौत मंगलवार को हुई। हिंदू राव अस्पताल में एक युवती की मौत हुई है। बच्चों, बुजुर्गो के लिए जानलेवा डॉक्टरों का कहना है कि चिकनगुनिया डेंगू की तरह जानलेवा नहीं है। लेकिन यह बुजुर्गो, बच्चों, गर्भवतियों मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर व हृदय की बीमारी पी़ि़डत मरीजों के लिए जानलेवा हो सकता है। दिल्ली में चिकनगुनिया के एक हजार मरीज सामने आए हैं।

क्या कहते हैं आकड़े

नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, डेंगू के 1,158, चिकनगुनिया के 1,057 तथा मलेरिया के 21 मामले सामने आए हैं. लेकिन अस्पतालों द्वारा जारी आंकड़े कुछ और ही बयां करते हैं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने अंतिम सप्ताह तक चिकनगुनिया के 900 से अधिक मामलों की पुष्टि की थी। सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल में छह मौतें हो चुकी हैं. एक सितंबर से लेकर अब तक डेंगू से पांच, जबकि चिकनगुनिया से एक मौत हुई है।

नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, 10 सितंबर तक डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया से संक्रमित लोगों की संख्या क्रमश: 1158, 1057 और 21 थी।