यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 16, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
डीएमआरसी ने एक से दूसरी सुरंग में जाने के लिए बनाए गए 100 गलियारे
सभी भूमिगत मेट्रो लाइनों पर मेट्रो ट्रेनों के परिचालन के लिए समानांतर दो सुरंगें बनाई गई हैं। मेट्रो में यात्री ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। मेट्रो के भूमिगत लाइनों के निर्माण में यात्रियों की सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने के विकल्पों का दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने पूरा ध्यान रखा है।
इसके तहत फेज तीन के निर्माणाधीन मेट्रो लाइनों के भूमिगत हिस्सों में समानांतर बने दोनों सुरंगों के बीच यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से ऐसे 100 गलियारे (क्रास पैसेज) बनाए गए हैं, जिससे आपात स्थिति के कारण सुरंग के अंदर मेट्रो में यात्री फंस जाएं तो उन्हें दूसरे सुरंग से सुरक्षित बाहर निकला जा सके।
फेज तीन में दिल्ली मेट्रो मौजूदा समय में मजलिस पार्क-शिव विहार, जनकपुरी-बॉटेनिकल गार्डन, केंद्रीय सचिवालय-कश्मीरी गेट और द्वारका-नजफगढ़ मेट्रो लाइन का निर्माण करा रहा है। इनका करीब 50 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत है। इसका काम लगभग पूरा हो चुका है।
सभी भूमिगत मेट्रो लाइनों पर मेट्रो ट्रेनों के परिचालन के लिए समानांतर दो सुरंगें बनाई गई हैं। इसका इस्तेमाल मेट्रो ट्रेनों के अप और डाउन में आने जाने के लिए अलग-अलग होता है। इन सुरंगों के बीच छह से 10 मीटर की दीवार होती है।
मेट्रो लाइनों व ट्रेनों में कई बार तकनीकी खामी आने की घटनाएं होती हैं। इसके चलते ट्रेनों का खाली करना पड़ता है और यात्रियों को सुरंगों से सुरक्षित बाहर निकालना पड़ता है। दो समानांतर सुरंगों को आपस में जोड़ने के लिए करीब 100 क्रॉस पैसेज का निर्माण किया गया है।
ये क्रॉस पैसेज गलियारे की तरह पैदल पार करने वाले रास्ते होते हैं। सुरंगों में प्रत्येक 240 मीटर की दूरी पर इस तरह के कंक्रीट के गलियारे बनाए गए हैं। इसकी चौड़ाई चार फीट और ऊंचाई सात फीट रखी गई है।
आपातकालीन स्थितियों या आग लगने की परिस्थिति में इन रास्तों के जरिये यात्रियों को एक सुरंग से सुरक्षित दूसरे सुरंग में ले जाकर बाहर निकाला जा सकेगा। दिल्ली मेट्रो की पुरानी लाइनों के सुरंगों में पहले से इस तरह के 108 गलियारे बने हुए हैं। जो समान्य रूप से बंद रहते हैं और ये अग्निशमन उपकरणों से लैस हैं।
