यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 22, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अब धौनी के घर में आर या पार, ये कंगारू होंगे सबसे बड़ा खतरा!
पहले वनडे में हार के बाद टीम इंडिया ने दूसरे वनडे में जब 360 रन के लक्ष्य को भी आसानी ...और पढ़ें

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। पहले वनडे में हार के बाद टीम इंडिया ने दूसरे वनडे में जब 360 रन के लक्ष्य को भी आसानी से रौंदते हुए कंगारुओं को पस्त किया, तो ऐसा लगा मानों अब तो इस इन फॉर्म टीम इंडिया से कंगारू बच नहीं सकेंगे..लेकिन तीसरे वनडे में कंगारुओं ने विपरीत हालातों में भी भारत के 300 से ऊपर के स्कोर को धुआंधार अंदाज में हासिल किया और मेजबान टीम को मुंहतोड़ जवाब दिया। अब बारी है चौथे वनडे की जहां पर चूक का मतलब होगा सीरीज की डोर हाथ से तकरीबन निकल जाना, अगर यहां हारे तो सीरीज जीत का सपना जहन से निकाल देना होगा। इस बार मैदान होगा अपने कप्तान साहब का घर (रांची), क्या ऐसे में धौनी कंगारू टीम पर लगाम कस पाएंगे? आइए जानते हैं कि कौन हैं वे कंगारू जिन पर माही को लगाम कसने की जरूरत होगी और जो भारतीय टीम के लिए रांची में सबसे घातक साबित हो सकते हैं..
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1. जेम्स फॉकनर:
ये वह खिलाड़ी है जिसने पहले वनडे मैच से ही भारतीय टीम पर दबाव बनाकर रखा है। एक ऑलराउंडर की भूमिका में वह पूरी तरह से फिट बैठे हैं और मौजूदा समय में कंगारू टीम की सबसे मजबूत कड़ी भी हैं। तीसरे वनडे मैच में जब कंगारू टीम अपने 6 विकेट खोकर 303 के लक्ष्य का पीछा करते हुए बुरे दौर से गुजर रही थी, उस समय फॉकनर ने अपने बल्ले से ऐसा कहर बरपाया कि टीम इंडिया तकरीबन एक जीता हुआ मैच भी गंवा बैठी। फॉकनर ने छह छक्कों व दो चौकों की मदद से 29 गेंदों में नाबाद 64 रन बनाए, इसके अलावा उन्होंने एक विकेट भी लिया था जबकि पहले वनडे में उनकी ही गेंदों ने सबसे ज्यादा भारतीय शिकार किए थे।
2. एरोन फिंच:
पिछले वनडे में फिंच बेशक 38 रन पर आउट हो गए हैं लेकिन अपने करियर के पिछले 6-7 वनडे मैचों में जिस अंदाज में यह कंगारू सलामी बल्लेबाज खेला है, उसने वॉर्नर, पोंटिंग जैसे कई दिग्गज खिलाड़ियों की कमी का अहसास नहीं होने दिया। अपने धुआंधार खेल से रांची में भी फिंच अपना प्रभाव छोड़ सकते हैं, ऐसे में धौनी के सामने यह शानदार बल्लेबाज एक बड़ी चुनौती रहेगा। अब तक 3 वनडे मैचों में फिंच ने 90.90 के स्ट्राइक रेट से 160 रन बनाए हैं जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं।
3. जॉर्ज बैली:
ये कंगारू कप्तान उन खिलाड़ियों में से है जिनको अब तक शायद कप्तान का वो रुतबा हासिल हो नहीं पाया है जो शायद आज तक बाकी के कंगारू कप्तानों ने हासिल किया। कम अनुभव के बावजूद उनको कप्तानी सौंपने के इस फैसले पर ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं की शुरुआत में काफी आलोचना झेली लेकिन हाल में उनकी कुछ शानदार पारियों ने साबित कर दिया कि वो टीम के छुपा रूस्तम साबित हो रहे हैं। इस सीरीज के पहले वनडे में 85 रनों की मैच जिताऊ पारी और फिर हार के बावजूद सुर्खियां बटोरने वाली दूसरे वनडे की नाबाद 92 रनों की पारी, इस सीरीज का मुख्य आकर्षण रही हैं। उन्होंने अब तक 3 मैचों में 114.58 के शानदार स्ट्राइक रेट से कप्तानी पारियां खेलते हुए सीरीज में 220 रन बनाए हैं और रन बनाने के मामले में शीर्ष पर मौजूद भारत के विराट कोहली (229) से सिर्फ नौ रन ही पीछे हैं।
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4. मिचेल जॉनसन:
ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजी क्रम के सबसे घातक गेंदबाज मिचेल जॉनसन रांची में भी अपनी टीम के सबसे मुख्य हथियार होंगे। अब तक सीरीज में दोनों टीमों को मिलाकर गेंदबाजों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले इस गेंदबाज ने 3 मैचों में 5.24 के इकॉनमी रेट से 5 विकेट लिए हैं। इस सीरीज में अब तक हर पिच पर गेंदबाजों की जमकर क्लास लगाई गई है क्योंकि बल्लेबाजों को हर बार मनमाफिक पिच मिलीं, ऐसे में भी जॉनसन ने अपनी रफ्तार का खूब इस्तेमाल किया और भारतीय बल्लेबाजों को बैकफुट पर ढकेलने व उन पर दबाव बनाने का काम किया। रांची में अब तक सिर्फ एक वनडे हुआ है, जहां इंग्लैंड के खिलाफ गेंदबाजों का ही जलवा दिखा था, इसलिए एक बार फिर रांची में मिचेल जॉनसन पर धौनी सेना को खास ध्यान देना होगा।
5. शेन वॉटसन:
ये ऑलराउंडर फॉर्म से बाहर हो या फॉर्म में, लेकिन अगर वो टीम में मौजूद हैं तो विरोधी टीम के लिए हमेशा ही बड़ा खतरा रहते हैं। कभी गेंदबाजी से, तो कभी बल्लेबाजी से, वो कुछ ना कुछ ऐसा जरूर करते हैं कि सुर्खियां बटोर लें। तीन मैचों में तीन विकेटों के साथ वह विकेट लेने के मामले में सीरीज में अपने साथी क्लिंट मैके के साथ चौथे स्थान पर हैं, हालांकि बल्लेबाजी में वो अब तक कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए हैं और अब तक तीन मैचों में कुल 72 रन ही बना सके हैं, लेकिन उनके बल्ले से एक अर्धशतक (59) जरूर निकला है, जो ये साबित करता है कि मौका मिलते ही उनका बल्ला फिर से गरज सकता है, और अगर ऐसा रांची में हुआ तो भारतीय गेंदबाजों की खैर नहीं, क्यों लगातार आइपीएल व चैंपियंस लीग के जरिए उन्हें वैसे ही भारतीय पिचों पर खेलने का अच्छा अनुभव हो चुका है।
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