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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 05, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इस कंगारू ने दी थी 'नंबर वन सुपरस्टार' जड्डू को पहली उड़ान

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Published: Mon, 05 Aug 2013 11:07 AM (IST)Updated: Mon, 05 Aug 2013 11:03 PM (IST)

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। रवींद्र जडेजा..आज यह नाम हर भारतीय क्रिकेट फैन की जुबान पर है और हर विरोधी बल्लेबाज ...और पढ़ें

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(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। रवींद्र जडेजा..आज यह नाम हर भारतीय क्रिकेट फैन की जुबान पर है और हर विरोधी बल्लेबाज के लिए डर का सबब। हर बल्लेबाज इस बात को लेकर खौफ में रहता है कि पारी के किस ओवर में जडेजा को गेंद सौंप दी जाएगी और फिर उन्हें सामना करना पड़ेगा उस रहस्यमयी गेंदबाजी से जहां कब विकेट निकले पता नहीं..आज जडेजा विश्व में नंबर एक गेंदबाज बनकर इतिहास रच चुके हैं लेकिन क्या आपको पता है कि क्रिकेट के शीर्ष स्तर पर इस क्रिकेटर को सबसे पहले असली हीरा किसने करार दिया था, वह कौन था जिसने जडेजा को सबकी नजरों के सामने रखने में अहम भूमिका अदा की और वह कौन था जिसने जडेजा पर तब भरोसा किया जब शायद किसी को उनकी प्रतिभा पर इतना ऐतबार नहीं था..

दरअसल, इसे भविष्यवाणी कहें या अनुभव का फायदा लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज स्पिनर शेन वॉर्न ही वह खिलाड़ी थे जिन्होंने कई सालों पहले ही जडेजा के प्रदर्शन को देखकर यह कह दिया था कि यह खिलाड़ी सुपरस्टार बनने की राह पर निकल चुका है और उनके दम पर ही एक हरफनमौला खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली उड़ान नसीब हुई थी। जडेजा ने आइपीएल का सफर शेन वॉर्न की अगुवाई में ही राजस्थान रॉयल्स टीम से शुरू किया था और पहले सीजन के खिताब को जीतने में राजस्थान टीम में अहम योगदान भी दिया था। उस सीजन में वॉर्न ने जडेजा के अंदर मौजूद प्रतिभा को पहचान लिया था और इसके चलते उन्हें खूब मौके भी दिए। नतीजतन जडेजा ने उस सीजन में 131.06 की स्ट्राइक रेट से 14 मैचों में 135 रन जड़े थे, और 2009 के सीजन में तो यह प्रदर्शन और भी बेहतर हो गया। उस दूसरे आइपीएल सीजन में जडेजा ने 110.90 की स्ट्राइक रेट से 295 रन जड़े थे और गेंदबाजी में रन लुटाने का औसत 6.5 रन से कम रखा। यह प्रदर्शन बेशक किसी महान क्रिकेटर के बनने की निशानी नहीं कही जा सकती थी लेकिन वॉर्न ने तभी ऐलान कर दिया था कि जडेजा सुपरस्टार बनने की राह पर हैं और उनका नाम रॉकस्टार रख दिया था। 2010 में फिर वह कुछ विवादों के चलते किसी टीम का हिस्सा नहीं बन सके, 2011 में कोच्चि टस्कर्स ने उन्हें खरीदा लेकिन यह सौदा ज्यादा फायदेमंद नहीं साबित हुआ क्योंकि कोच्चि की टीम को आइपीएल से अगले ही सीजन में हटा दिया गया और फिर अगले सीजन में जडेजा को वह मिला जो शायद उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा..2012 की आइपीएल नीलामी में जडेजा को चेन्नई सुपरकिंग्स ने तकरीबन 10 करोड़ में खरीदा और वह उस नीलामी की सबसे महंगी डील भी साबित हुए।

आज रवींद्र जडेजा दुनिया के शीर्ष गेंदबाज बन चुके हैं और टीम इंडिया हो या फिर आइपीएल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स, कप्तान महेंद्र सिंह धौनी उन्हें टीम से बाहर रखने की सोचते तक नहीं हैं और हाल में जिंबॉब्वे दौरे पर भी जब जडेजा का प्रदर्शन कुछ खास नहीं दिखा तो सभी ने उनकी जगह रसूल को टीम में शामिल किए जाने की वकालत करनी शुरू कर दी, जिस पर टीम के कप्तान विराट कोहली ने भी यही कहा था कि हम एक ऐसे खिलाड़ी को टीम से बाहर नहीं रख सकते जो जरूरी मौकों पर हमें सफलताएं दिलाता हो। खैर, कुछ भी हो लेकिन आज जडेजा जिस मुकाम पर हैं उसका श्रेय काफी हद तक वॉर्न को भी जाता है जिन्होंने जडेजा को मौका देते हुए आइपीएल के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस खिलाड़ी को सबके सामने रखा और आज नतीजा सबके सामने है।

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