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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 17, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

फिर बोतल से बाहर निकला 'मंकीगेट' का जिन्न

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Published: Thu, 17 Oct 2013 10:24 PM (IST)Updated: Thu, 17 Oct 2013 10:26 PM (IST)

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने एक बार फिर 'मंकीगेट' विवाद की याद ताजा की है। पोंटिंग ने सचिन तेंदुलकर ...और पढ़ें

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मेलबर्न। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने एक बार फिर 'मंकीगेट' विवाद की याद ताजा की है। पोंटिंग ने सचिन तेंदुलकर की भूमिका पर यह कहकर सवाल उठाया है कि हरभजन सिंह को बचाने वाले इस वरिष्ठ भारतीय बल्लेबाज के बयान से वह स्तब्ध रह गए थे।

अपने संस्मरण 'द क्लोज ऑफ प्ले' में पोंटिंग ने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आया कि अपील पर सुनवाई के दौरान तेंदुलकर ने हरभजन का साथ क्यों दिया। जब मैच रैफरी माइक प्रॉक्टर ने हरफनमौला एंड्रयू सायमंड्स पर कथित नस्ली टिप्पणी के लिए शुरू में हरभजन को निलंबित किया था तब वह चुप रहे थे। पोंटिंग ने कहा, 'मेरी समझ में नहीं आता कि सचिन ने मैच रैफरी माइक प्रॉक्टर को पहले यह बात क्यों नहीं बताई।'

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2008 के सिडनी टेस्ट के दौरान हरभजन पर आरोप था कि उन्होंने सायमंड्स को 'मंकी' (बंदर) कहा था जिसके कारण इस भारतीय ऑफ स्पिनर को तीन टेस्ट के लिए निलंबित कर दिया गया था। बाद में अपील पर सुनवाई के दौरान उन पर से निलंबन हटा दिया था। न्यूजीलैंड के न्यायमूर्ति जॉन हेंसन द्वारा की गई सुनवाई में तेंदुलकर गवाह के तौर पर पेश हुए थे और उन्होंने हरभजन के पक्ष में गवाही दी थी।

इस विवाद में तेंदुलकर की भूमिका पर सिर्फ पोंटिंग ने ही अंगुली नहीं उठाई, बल्कि पूर्व विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट ने भी पांच साल पहले अपनी आत्मकथा में यही बात कही थी। पोंटिंग ने उस घटना के बारे में कहा कि उन्हें बड़ा अजीब लगा, जब उस घटना के बाद हरभजन पर सिर्फ जुर्माना लगाया गया, जबकि उस घटना से दोनों देशों के आपसी संबंध खराब होने का खतरा पैदा हो गया था।

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'डेली टेलीग्राफ' में छपे किताब के अंशों में पोंटिंग ने इस बारे में कहा, 'प्रशासनिक गलती का हवाला देकर जज को हरभजन के पिछले किसी अपराध के बारे में नहीं बताया गया जिससे उसे वह सजा नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। शायद 21वीं सदी में भारतीय क्रिकेट का इतना दबदबा हो गया था कि उसे हिलाया नहीं जा सकता था। लेकिन फिर मैंने सोचा कि किस तरह से खेल में कई लोगों ने हमारी मंशा पर सवाल उठाए। कैसे उन्होंने सोचा कि हम उसूलों पर काम करने की बजाय सीरीज में फायदा लेना चाहते हैं।' उन्होंने कहा कि तत्कालीन भारतीय कप्तान अनिल कुंबले के इस बयान ने हमारी टीम की छवि खराब कर दी कि ऑस्ट्रेलिया खेलभावना से नहीं खेला।

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