यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 17, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जांच समिति ने की डीडीसीए के निलंबन की सिफारिश
दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में धांधली की जांच के लिए बनी दिल्ली सरकार की समिति ने संघ को ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में धांधली की जांच के लिए बनी दिल्ली सरकार की समिति ने संघ को निलंबित करने की सिफारिश की है। समिति ने दिल्ली सरकार को सौंपी रिपोर्ट में लिखा है कि वह बीसीसीआइ से डीडीसीए को निलंबित करने की सिफारिश करें। हालांकि आइपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला, बीसीसीआइ और डीडीसीए ने इस पैनल की सिफारिशों की वैधता पर ही सवाल उठा दिए हैं।
जांच समिति ने अपनी सिफारिशों में डीडीसीए की कमान पूर्व क्रिकटरों के हाथ में देने को भी कहा है और ये भी बोला कि संघ को आरटीआइ के दायरे में आना चाहिए। दरअसल, पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी और मदनलाल ने कुछ दिन पूर्व ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी और डीडीसीए को साफ सुथरा बनाने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। इसके बाद दिल्ली सरकार की तरफ से सतर्कता विभाग के प्रधान सचिव चेतन सांघी की अगुआई वाली समिति को डीडीसीए में वित्तीय धोखाधड़ी और ढांचागत अनियमितताओं की जांच करने को कहा गया था। डीडीसीए के 13 सदस्य तीन सदस्यीय जांच समिति के समक्ष उपस्थित हुए थे। समिति का मानना है कि उसकी रिपोर्ट आइपीएल सट्टेबाजी प्रकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा समिति को सौंपी जानी चाहिए। लोढ़ा समिति फिलहाल बीसीसीआइ की कार्यशैली में सुधार के लिए सुझाव तैयार करने पर काम कर रही है।
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राज्य सरकार डीडीसीए की कार्यशैली पर तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है। समिति का कहना है कि इस जांच का चौथे टेस्ट की मेजबानी से कोई लेना देना नहीं है। सरकार को लगता है कि खेल राज्य का मुद्दा है और उसके पास अधिकार हैं कि वह राजधानी में खेलों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के लिए कानून लाए।
