यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 05, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दर्शक झूम उठे जब रूट ने वॉर्नर से ऐसे लिया मुक्के का बदला
कुछ ही समय पहले एक शानदार युवा कंगारू खिलाड़ी कुछ इस कदर विवादों में आया कि उसे पवेलियन में बैठकर ...और पढ़ें

मैनचेस्टर। कुछ ही समय पहले एक शानदार युवा कंगारू खिलाड़ी कुछ इस कदर विवादों में आया कि उसे पवेलियन में बैठकर ही पहले दो एशेज टेस्ट देखने पर मजबूर कर दिया गया। मामला था एक पब का, जहां कंगारू खिलाड़ी डेविड वॉर्नर ने चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान युवा इंग्लिश खिलाड़ी जोई रूट पर अपनी असफलता का गुस्सा, मुक्का जड़कर निकाला लेकिन वह कहते हैं ना कि मौका सबको मिलता है..बेशक मुक्का मारकर बदला ना लिया हो लेकिन जैसे ही वॉर्नर तीसरे टेस्ट की दूसरी पारी में अर्धशतक के करीब पहुंचे, रूट ने अपना बदला पूरा कर ही लिया।
मैनचेस्टर में जारी तीसरे एशेज टेस्ट की पहली पारी में डेविड वॉर्नर को काफी नीचे बल्लेबाजी करने के लिए भेजा गया और वह इस स्थान पर इतने बेचैन दिखे कि 5 रन पर ही अपना विकेट गंवा दिया। इसके बाद दूसरी पारी में कप्तान को वॉर्नर को उनके पसंदीदा स्थान यानी ओपनिंग करने उतारा। उम्मीद थी कि वॉर्नर यहां अपनी वापसी का संकेत दे देंगे, सब कुछ ठीक भी चल रहा था और वॉर्नर 56 गेंदों पर 41 रन बना भी चुके थे। इंतजार था बस उनके अर्धशतक का जो कि उनकी वापसी के ढोल पीटने में मदद करता..लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ क्योंकि बाउंड्री पर खड़े जोई रूट बदले की आग में तप रहे थे और मौका मिलते ही उन्होंने इसे पूरा भी किया। ब्रेसनन ने वॉर्नर को शॉर्ट गेंद फेंकी और पुल करने के चक्कर में वह गेंद को हवा में लहरा बैठे, गेंद जा तो रही थी सीमा रेखा के पार लेकिन डीप स्कवायर लेग पर खड़े रूट ने अपनी भड़ास पूरी की और बिना कोई चूक करते हुए कैच लपक लिया। मैदान पर मौजूद हर इंग्लिश फैन इस कैच की अहमियत व इसके पीछे की कहानी को समझ रहा था और शायद इसीलिए सभी ने कदमों पर खड़े होकर झूमते हुए तालियां बजाईं और जश्न मनाया। वहीं, रूट के चेहरे पर भी मुस्कान थी जो कि उनकी खुशी को बयां कर रही थी।
वॉर्नर पवेलियन लौट चुके थे और एक बार फिर वॉर्नर की बल्लेबाजी को लेकर सवाल उठने लगे थे, शायद यही वह बदला था जिसकी रूट को दरकार होगी। खुद डेविड वॉर्नर ने मैच के बाद इस विकेट पर बोलते हुए कहा कि यह काफी अजीब था कि मैंने शॉट मारा और वह भी पूरे मैदान पर मौजूद तमाम फील्डरों में से सिर्फ और सिर्फ रूट के हाथों में। मैदान पर दर्शक खड़े होकर तालियां बजा रहे थे लेकिन यही क्रिकेट है, आपको दर्शकों की भावनाओं की हर मौके पर इज्जत करनी होती है। आप नाराज होते हो लेकिन फिर भी चेहरे पर मुस्कराहट को बरकरार रखना होता है।
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