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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 22, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नहीं पैदा होगा दूसरा सचिन

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Published: Tue, 22 Oct 2013 07:11 PM (IST)Updated: Tue, 22 Oct 2013 07:15 PM (IST)

खेल के प्रति उनका समर्पण और जुनून। साधारण व्यक्तित्व। शांत मिजाज और मृदु भाषी। सभी के साथ एक जैसा व्यवहार। ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। खेल के प्रति उनका समर्पण और जुनून। साधारण व्यक्तित्व। शांत मिजाज और मृदु भाषी। सभी के साथ एक जैसा व्यवहार। यह कुछ ऐसे गुण हैं जो क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर को दूसरे क्रिकेटरों से अलग रखते हैं। ऐसा बहुत कम क्रिकेटर के अंदर होता है। इससे भी बढ़कर बिना किसी विवाद के लगातार 24 वर्षो तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलना। इसलिए तो विश्व क्रिकेट में वह असाधारण क्रिकेटर हैं और रहेंगे भी। अगर हमारे देश के अन्य खिलाड़ी उनके दस प्रतिशत गुण भी अपना लें तो उसे खेलों की महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।

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युवा क्रिकेटर खो देंगे प्रेरणास्त्रोत

युवा क्रिकेटर तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ी के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका गंवा देंगे। मास्टर-ब्लास्टर के बिना भारतीय क्रिकेट की कल्पना करना मुश्किल है। देर सवेर उनकी जगह तो कोई ले लेगा, लेकिन सचिन जैसा खिलाड़ी देश तो क्या दुनिया में दूसरा पैदा नहीं होगा।

'शो मस्ट गो ऑन'

किसी के आने-जाने से खेल का कोई नुकसान नहीं होता है। 'शो मस्ट गो ऑन'। खेल तो लगातार जारी रहेगा। पर भारतीय क्रिकेट को उनकी कमी खलेगी जरूर। जब सुनील गावस्कर और कपिल देव ने संन्यास लिया था तब भी कहा जा रहा था कि क्रिकेट को नुकसान होगा और लोग क्रिकेट देखना छोड़ देंगे। लेकिन उसके बाद सचिन ने उसे भरा। अब उनकी जगह कोई और भरेगा। दर्शक थोड़ा निराश और दुखी होंगे, लेकिन समय के साथ सब ढर्रे पर आ जाएगा।

फैसले का करें सम्मान

यह उनका खुद का फैसला है। उन्होंने काफी सोच समझकर यह निर्णय लिया होगा। जो खाते-पीते, सोते और सांस लेते हुए भी क्रिकेट के बारे में सोचता हो उसके लिए यह निर्णय लेना काफी मुश्किल हुआ होगा। हमें उनके इस फैसले का सम्मान करना चाहिए।

शतक लगाकर लें विदाई

वह अपने विदाई मैच में जैसा भी खेलें उनके प्रति सम्मान कम नहीं होगा। सचिन ने प्रथम श्रेणी में पदार्पण वानखेड़े स्टेडियम में किया था और अब वह यहां अपना अंतिम टेस्ट खेलेंगे। फिर भी मैं दिल से यही चाहता हूं कि वह शतकीय पारी खेल कर अपने सुनहरे सफर का अंत करें। लेकिन अगर दोहरा या तिहरा शतक लगे तो यह सोने पर सुहागा होगा।

(पूर्व टेस्ट क्रिकेटर मदन लाल की राजीव शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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