यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 30, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
BSSC SCAM: परमेश्वर राम ने FSL नियुक्ति में भी की थी हेराफेरी
एफएसएल में वरीय वैज्ञानिक सहायक के पद पर नियुक्ति में बीएसएससी के निलंबित पूर्व सचिव परमेश्वर राम ने एफएसएल के ...और पढ़ें

पटना [राजीव रंजन]। एफएसएल में वरीय वैज्ञानिक सहायक के पद पर हुई नियुक्ति में बीएसएससी के निलंबित सचिव परमेश्वर राम ने एफएसएल के निदेशक के साथ मिलकर धांधली की थी। दोनों ने मिलकर आठ सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी। हालांकि, इस मामले में सीआइडी के एडीजी ने एफएसएल के निदेशक की भूमिका संदिग्ध पाई है।
परमेश्वर राम ने एफएसएल के निदेशक उमेश कुमार सिन्हा की एक फर्जी रिपोर्ट के आधार पर यूजीसी की मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों को फर्जी करार दे दिया। जब इस मामले की जांच सीआइडी के तत्कालीन एडीजी आलोक राज के स्तर से की गई तो पाया गया कि परमेश्वर राम ने एफएसएल निदेशक उमेश कुमार सिन्हा की रिपोर्ट को जायज बताकर इन दोनों प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुल आठ सफल अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है और उनकी डिग्री को फर्जी बताकर उनकी नियुक्ति रुकवा दी।
विदित हो कि विश्वविद्यालयों की मान्यता और उसकी डिग्री संबंधी जांच बिहार कर्मचारी चयन आयोग अपने स्तर से करनी है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया और आयोग ने बिना किसी जांच के ही एफएसएल निदेशक की रिपोर्ट की आपत्ति को सही करार देकर आठ सफल अभ्यर्थियों के रिजल्ट पर रोक लगा दी।
इस मामले में सीआइडी के एडीजी आलोक राज ने एफएसएल निदेशक से तीन-तीन बार स्पष्टीकरण की मांग की। लेकिन निदेशक के तीनों ही स्पष्टीकरण को अंसतोषजनक पाया गया। एडीजी ने इस मामले में गृह विभाग के प्रधान सचिव से एफएसएल निदेशक उमेश कुमार सिन्हा के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने की भी अनुशंसा कर रखी है। लेकिन अभी तक निदेशक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की गई है।
बता दें कि एफएसएल को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2015 में बीएसएससी के माध्यम से कुल 35 वरीय वैज्ञानिक सहायकों की नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया था। ये वैसे वरीय वैज्ञानिक सहायक थे जो पहले से एफएसएल में संविदा के आधार पर कार्यरत थे।
ऐसे वरीय वैज्ञानिक सहायकों की संविदा पर नियुक्ति के समय भी एफएसएल निदेशक उमेश कुमार सिन्हा चयन बोर्ड में शामिल थे। तब उन्होंने इन आठ अभ्यर्थियों की डिग्री पर कोई सवाल नहीं उठाया। लेकिन जब स्थाई नियुक्ति का समय आया तब निदेशक ने उनकी डिग्री को ही फर्जी करार दे दिया।
सीके अनिल की हैंडराइटिंग का नमूना लेगी एफएसएल टीम
बीएसएससी प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच कर रही एसआइटी ने फरार चल रहे वरिष्ठ आइएएस अधिकारी व आयोग के ओएसडी सीके अनिल पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष व जेल में बंद आइएएस अधिकारी के अवकाश के आवेदन पर उनका फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में एसआइटी सीके अनिल के खिलाफ सबूत जुटा रही है।
सूत्रों ने बताया कि इसके लिए एसआइटी सीके अनिल के हस्ताक्षर और उनकी हैंडराइटिंग का नमूना एकत्र करने के लिए उनके दोनों दफ्तरों, राज्य योजना पर्षद और बीएसएससी जाएगी। एसआइटी के साथ एफएसएल के अधिकारी भी होंगे। इन दोनों दफ्तरों से सीके अनिल की हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के नमूनों को एकत्र कर उसका मिलान उस हस्ताक्षर से किया जाएगा, जो सुधीर कुमार की छुट्टी के आवेदन पर पाया गया है।
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बता दें कि सुधीर कुमार ने अपनी गिरफ्तारी के बाद एसआइटी की पूछताछ में साफ कर दिया था कि उन्होंने अपनी छुट्टी का कोई आवेदन न तो मुख्य सचिव के पास और न ही सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा था। एसआइटी का शक है कि इस आवेदन पर सीके अनिल ने ही सुधीर कुमार के फर्जी हस्ताक्षर किए थे।
