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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 12, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

BCCI देगा पैसा, 60 दिन के अंदर होगा बिहार क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव

By Amit AlokEdited By:
Published: Wed, 12 Aug 2015 07:44 AM (IST)Updated: Wed, 12 Aug 2015 07:51 AM (IST)

15 साल वनवास के बाद बिहार में क्रिकेट की वापसी होने वाली है। अब यहां के क्रिकेटर रणजी या बीसीसीआइ ...और पढ़ें

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पटना। 15 साल वनवास के बाद बिहार में क्रिकेट की वापसी होने वाली है। अब यहां के क्रिकेटर रणजी या बीसीसीआइ के अन्य बड़े टूर्नामेंट खेलने के लिए दूसरे राज्यों के रहमो-करम पर नहीं रहेंगे।

वे अब गर्व से स्वयं को बिहारी क्रिकेटर कह सकेंगे। मंगलवार को बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगने से यह संभव हो पाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव का सारा खर्च बीसीसीआइ को देने के लिए कहा था, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। 60 दिनों के अंदर चुनाव कार्य संपन्न होगा, जो 2013 से लंबित है। चुनाव के बाद बीसीए बीसीसीआइ से पूर्ण मान्यता की मांग करेगी।

तदर्थ समिति के खिलाफ चैलेंज

बीसीए के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि छह अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद बीसीसीआइ ने सात अगस्त को तदर्थ समिति की घोषणा कर दी। इसके बाद बीसीए ने 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज भी किया था कि किस आधार पर बीसीसीआइ ने तदर्थ समिति का गठन किया है, जबकि पहले से बीसीए बिहार में बीसीसीआइ का एसोसिएट सदस्य है।

अगर ऐसा करना ही है तो पहले बीसीए की मान्यता रद करें, उसके बाद ही तदर्थ समिति का गठन हो सकता है। जगन्नाथ के अनुसार, मंगलवार को सुनवाई में बीसीसीआइ ने तदर्थ समिति को प्रशासनिक समिति बता पल्ला झाड़ लिया। अब यह प्रशासनिक समिति बीसीए चुनाव में पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएगी।

112 वोटर हैं बीसीए में

इस फैसले के बाद सूबे में अब सारे खेल प्रेमियों की नजरें बीसीए के चुनाव पर टिक गई हैं। बीसीए में 38 जिलों के दो प्रतिनिधि व इसके अलावा 36 अन्य सदस्यों को मिलाकर कुल 112 वोटर अपने मत का प्रयोग करेंगे। कोर्ट से लिखित फैसला आने के बाद चुनाव पर्यवेक्षक धर्मपाल सिन्हा को मतदाताओं की लिस्ट सौंपी जाएगी।

इन्होंने कहा-

  • सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में क्रिकेट को फिर से जिंदा किया है। कोर्ट के निर्णय की कॉपी मिलते ही चुनाव की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। चुनाव संपन्न होने के बाद पूर्ण मान्यता की मांग बीसीसीआइ से की जाएगी। - अजय नारायण शर्मा, बीसीए सचिव
  • यह बीपीए और क्रिकेटरों का संयुक्त प्रयास है, जिससे एक बार फिर से राज्य में सुनहरे क्रिकेट का भविष्य दिखाई देने लगा है। पूर्व तदर्थ समिति चुनाव में हरसंभव सहयोग करेगी। -2010 में बनी तदर्थ समिति के सदस्य मृत्युंजय तिवारी

एक नजर में पूरी बात-

  • उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्मपाल सिन्हा की देखरेख में होगा चुनाव
  • इसके बाद होगी बीसीसीआइ से पूर्ण मान्यता की मांग
  • 60 दिनों के अंदर होगा चुनाव
  • 1999 में बिहार विभाजन के बाद सूबे में क्रिकेट हुआ बदहाल
  • 2002 में बीसीसीआइ ने पर्यवेक्षक दल भेजा था
  • 2010 में अब्दुल बारी सिद्दीकी के नेतृत्व में तदर्थ समिति बनी
  • 2011 सितंबर में आखिरी बार हुआ था बीसीए का चुनाव
  • 06 अगस्त 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने बीसीए के चुनाव को हरी झंडी दिखाई
  • 07 अगस्त 2015 को बीसीसीआइ ने आनन-फानन में तदर्थ समिति बनाई
  • 11 अगस्त 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने बीसीए की मान्यता पर लगाई मुहर