अमेरिकी प्रत्यर्पण के खिलाफ कोर्ट पहुंचा ब्रिटिश-भारतीय कपल, कैंसर की दवा में धोखाधड़ी का आरोप
ब्रिटेन में रह रहे भारतीय मूल के एक दंपति अमेरिकी प्रत्यर्पण से बचने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। ...और पढ़ें


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डिजिटल डेस्क, लंदन। ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के व्यवसायी सुखजीत सिंह घुमन (48) और उनकी पूर्व पत्नी किरणजीत घुमन (48) अमेरिका प्रत्यर्पण से बचने के लिए ब्रिटेन की अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
दोनों पर भारत से गैर-मान्यता प्राप्त दवाएं अमेरिका तस्करी करने और मेडिकेयर जैसी अमेरिकी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप लगे हैं।
प्रॉसिक्यूटर के अनुसार, सुखजीत और किरणजीत के कैलिफोर्निया और एरिजोना में कैंसर क्लीनिक थे। आरोप है कि 2019 से 2023 के बीच इन क्लीनिकों में कैंसर के मरीजों को उनकी जानकारी के बिना विदेशी, गैर-मान्यता प्राप्त और एक्सपायर हो चुकी कीमोथेरेपी दवाएं दी गईं।
इसके बाद क्लीनिकों ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को यह दिखाकर बिल भेजा कि मरीजों को यूएस एफडीए द्वारा स्वीकृत महंगी दवाएं दी गई थीं, इस हेरफेर से होने वाला भारी मुनाफा अपनी जेब में रख लिया। इसके अलावा उन पर बिना लाइसेंस एफडीए-मंजूर दवाएं खरीदकर दोबारा बेचने का भी आरोप है।
प्रत्यर्पण के विरोध में बचाव पक्ष की दलीलें
हाल ही में तलाक ले चुका यह जोड़ा नॉटिंघमशायर में रहता है और पिछले हफ्ते लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में पेश हुआ। अदालत में मनोचिकित्सकों ने साक्ष्य पेश किए कि दोनों डिप्रेशन से पीड़ित हैं और अमेरिका भेजे जाने पर वे आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा सकते हैं।
सुखजीत के वकील बेन कूपर ने अमेरिकी जेलों की बदहाली का हवाला देते हुए दावा किया कि वहां कैदियों की घोर उपेक्षा की जाती है, पीने का पानी तक नहीं दिया जाता और कैदी टॉयलेट का पानी पीने को मजबूर होते हैं।
इसके साथ ही वकीलों ने तर्क दिया कि सुखजीत की अमीरी या सिख पहचान के कारण जेल में आपराधिक गिरोह उन्हें निशाना बना सकते हैं और उन्हें अन्य कैदियों के सामने नहाने और शौचालय इस्तेमाल करने पर मजबूर किया जाएगा, जो यूरोपीय मानवाधिकार कन्वेंशन (ईसीएचआर) के अनुच्छेद 3 का उल्लंघन है।
अमेरिकी सरकार का पक्ष
किरणजीत की वकील अमांडा बोस्टॉक ने अदालत में दलील दी कि किरणजीत इस पूरे कारोबार में केवल एक सामान्य पक्ष थीं और वे मुख्य निर्णयकर्ता नहीं थीं। उनका कसूर केवल अपने पूर्व पति के साथ एक संयुक्त बैंक खाता साझा करना था, इसलिए उनका प्रत्यर्पण करना अन्यायपूर्ण होगा।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील पीटर काल्डवेल ने प्रत्यर्पण का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने कैदियों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी लेता है और दोनों आरोपी इन क्लीनिकों को नियंत्रित करते थे।
अमेरिका में दोनों के खिलाफ संयुक्त रूप से आरोप तय किए गए हैं, इसलिए क्लीनिकों में किसी एक की भूमिका को कमतर नहीं माना जा सकता।
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