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'जीतने के बाद इसे ढहा देंगे...', टेक्सस में हनुमान प्रतिमा पर यूट्यूबर की धमकी; भारतीय मूल के सैनिक ने दिया करारा जवाब

Published: Tue, 22 Sep 2026 02:06 PM (IST)

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के दौरान भारतीय-अमेरिकी समुदाय और हिंदू आस्था पर विवाद बढ़ गया है, एक यूट्यूबर ने टेक्सस ...और पढ़ें

HighLights

  1. यूट्यूबर ने टेक्सस में हनुमान मूर्ति हटाने की धमकी दी।

  2. भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने धार्मिक कट्टरता पर कड़ा विरोध जताया।

  3. पूर्व अमेरिकी सैनिक ने इसे हिंदू धर्म के लिए खतरा बताया।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के दौरान भारतीय-अमेरिकी समुदाय राजनीतिक बहस का मुख्य केंद्र बन गए हैं, खासकर हिंदू और उनकी आस्था पर विवादित बयान दिए जा रहे है। यह विवाद तब और गहरा गया जब एक रूढ़िवादी यूट्यूबर ने टेक्सस में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची मूर्ति को हटाने की बात कही, जिसके बाद उसे कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

टेक्सास के शुगर लैंड स्थित अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित इस मूर्ति का नाम स्टैच्यू ऑफ यूनियन है। अगस्त 2024 में इसकी प्राण-प्रतिष्ठा के समय से ही विवादों में रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के कुछ समर्थकों ने इसे गैर-ईसाई करार दिया था।

हालांकि, इस बहस ने तब एक नस्लभेदी मोड़ ले लिया जब यूट्यूबर और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन कार्यकर्ता जेसी ह्यूजेस ने एक्स पर इस मूर्ति की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि वैसे, जब हम जीतेंगे, तो हम इसे गिरा देंगे।

पूर्व अमेरिकी सैनिक ने टिप्पणी को बताया हिंदू धर्म के लिए खतरा

ह्यूजेस की इस पोस्ट के बाद हिंदू संगठनों और विचारकों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने उनकी इस टिप्पणी को देशद्रोही और हिंदू धर्म के लिए खतरा बताया।

खुद को एक अमेरिकी-हिंदू बताते हुए बख्शी ने अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ रही नफरत पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी अन्य अमेरिकी समुदाय के पूजा स्थल पर सिर्फ इसलिए तोड़फोड़ करना क्योंकि आप उनकी आस्था से नफरत करते हैं, यह सीधे तौर पर हिंदू धर्म के लिए एक खतरा है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेरिका में जीतने का मतलब हिंदू मंदिरों को तोड़ना है, तो आप उस देश को नहीं चाहते जिसके लिए मैंने लड़ाई लड़ी है। आप बस उन लोगों को निशाना बनाने का लाइसेंस चाहते हैं जो आपकी तरह नहीं हैं।

बख्शी की इन बातों का कोलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका और टेक्सस के रहने वाले अमेरिकी सेना के एक अन्य पूर्व सैनिक व राजनीतिक विश्लेषक कार्ल व्हेलेस ने भी समर्थन किया।

CoHNA ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि इस प्लेटफॉर्म पर खुलेआम हो रही धार्मिक कट्टरता को देखकर हम भी उतने ही हैरान हैं जितने कि आप, और हमें आपके साथ मिलकर इसके खिलाफ लड़ने पर गर्व है।

texas

रिपब्लिकन का गढ़ है टेक्सस

टेक्सास दशकों से रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ रहा है और 1994 के बाद से यहां किसी भी पद पर कोई डेमोक्रेट नहीं चुना गया है। यह राज्य पांच लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकियों का घर है।

यहां रिपब्लिकन पार्टी का पूरी तरह से दबदबा है, जिसका मतलब है कि राज्य के गवर्नर पद, सभी प्रमुख कार्यकारी पदों और राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों पर इसी रूढ़िवादी पार्टी का कब्जा है।

टेक्सास में चुनाव प्रचार के दौरान प्रवासियों के खिलाफ बयानबाजी एक आम बात रही है, और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए व्हाइट हाउस में लौटने के बाद से यह और भी बढ़ गई है।

नस्लभेद चुनाव में बार-बार उठने वाला मुद्दा

पिछले हफ्ते, टेक्सास रेलरोड कमिश्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने अपने एक्स अकाउंट पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के एक फुटबॉल मैच की तस्वीर साझा की और छात्रों पर नस्लभेदी टिप्पणी की।

तस्वीर में मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई मूल के लोग दिखाई दे रहे थे। इसे साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि इस साल UT का ग्रेजुएशन कुछ ऐसा दिख रहा था। बो फ्रेंच ने इसे एक समस्या बताते हुए दावा किया कि हालात "किसी की भी कल्पना से कहीं ज्यादा खराब हैं।

रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने बो फ्रेंच की इस पोस्ट की कड़ी निंदा की और सवाल उठाया कि क्या अन्य रिपब्लिकन नेता भी इस तरह की असहिष्णुता और नस्लभेद का विरोध करेंगे?

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने भी पिछले हफ्ते एक बयान में कहा कि दक्षिणपंथी रिपब्लिकन नेता लगातार और बहुत ही आम तरीके से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

हालांकि, बो फ्रेंच ने बाद में अपनी टिप्पणी का बचाव किया और तर्क दिया कि यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की प्रवेश प्रक्रिया में टेक्सास के मूल निवासियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

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