विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

क्या ट्रंप के 'वेनेजुएला प्लान' को यूक्रेन में दोहराएंगे पुतिन? 5 कारणों से रूस के लिए होगा 'नामुमकिन'

Published: Thu, 08 Jan 2026 09:24 AM (IST)Updated: Thu, 08 Jan 2026 09:25 AM (IST)

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया, लेकिन क्या पुतिन यूक्रेन में जेलेंस्की के साथ ऐसा कर पाएंगे? कीव ...और पढ़ें

रूस के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की। फाइल फोटो

रूस के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की। फाइल फोटो

HighLights

  1. कीव में घुसना रूसी सेना के लिए होगा बेहद मुश्किल

  2. यूक्रेन को पश्चिमी देशों का मजबूत वैश्विक समर्थन प्राप्त

  3. मादुरो के विपरीत यूक्रेन में राजनीतिक शून्यता नहीं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद दुनिया में खलबली मच गई है। पहली बार ऐसा हुआ है जब अमेरिकी सेना ने किसी देश की राजधानी में घुसकर सिटिंग राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया और वापस अपने देश लेकर चली आई। अमेरिका इसे 'एक्ट ऑफ वॉर' नहीं मानता। अमेरिका की नजर में मादुरो सिर्फ एक अपराधी हैं, जिनपर अमेरिकी अदालत में मुकदमा चलेगा।

मगर, सवाल ये है कि अगर पुतिन भी यूक्रेन पर ट्रंप का दांव खेलते हैं, तो क्या वो कामयाब हो पाएंगे? कई राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन के लिए ये टास्क आसान नहीं होगा। आइए जानते हैं क्यों?

कीव को भेदना आसान नहीं

यूक्रेन पिछले 3 साल से युद्ध की चपेट मेंहै। यूक्रेन की राजधानी कीव हमेशा अलर्ट पर रहती है। पश्चिमी देश अक्सर यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करते हैं। वहीं, कीव में जेलेंस्की जहां रहते हैं, वो जगह अपने जगह अपने आप में एक अभेद्य किला है, जो सैनिकों और मिसाइलों से घिरा रहता है।

Ukraine President House

कीव स्थित राष्ट्रपति भवन। फाइल फोटो

कीव के चक्रव्यूह में फंसने का डर

यूक्रेन की राजधानी कीव रूसी सरजमीं से काफी दूर है, जहां पहुंचने के लिए यूक्रेन के एक बड़े हिस्से से गुजरना होगा। ऐसे में अगर रूसी जहाज कीव तक पहुंच भी गए, तो वहां से निकलना उनके लिए मुश्किल हो जाएगा। खासकर नाटो देशों का सर्विलांस तुरंत अलर्ट हो जाएगा, जिससे रूस को खाली हाथ ही यूक्रेन से लौटना पड़ सकता है।

जेलेंस्की के बाद भी कुछ नहीं बदलेगा

अगर तमाम मुश्किलों को पास करते हुए रूसी सेना जेलेंस्की तक पहुंच गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया, तो भी वेनेजुएला की तरह यूक्रेन में सियासी संकट आने की संभावना न के बराबर है। ऐसे समय पर यूक्रेन की सेना मोर्चा संभाल सकती है और रूस को भारी संख्या में लोगों का गुस्सा झेलना पड़ सकता है।

kyiv

यूक्रेन की राजधानी कीव। फाइल फोटो

जेलेंस्की को मिलने वाला वैश्विक समर्थन

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को वैश्विक स्तर पर ज्यादा देशों का समर्थन नहीं मिला था, लेकिन जेलेंस्की के साथ इसका ठीक उलटा है। यूक्रेन के खिलाफ रूस का कोई भी बड़ा कदम सभी पश्चिमी देशों को एक झटके में जेलेंस्की के साथ खड़ा कर सकता है। यूक्रेन को पश्चिमी देशों से हथियार समेत पैसे और सभी सुविधाएं आसानी से मिल सकती हैं।

Russia Ukraine war

3 शर्तें पूरी करना जरूरी

मादुरो की गिरफ्तारी के लिए अमेरिका को 3 बड़ी शर्तों पर खरा उतरना था - अचानक हमला, मादुरो की कम लोकप्रियता और वेनेजुएला में राजनीतिक शून्यता। यूक्रेन इन तीनों मोर्चों पर मजबूत है।

यह भी पढ़ें- वेनेजुएला के बाद US के निशाने पर भारत,चीन और ब्राजील, 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले बिल को ट्रंप ने दी मंजूरी