इस्‍लामाबाद, जेएनएन। Imran Khan : पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शुक्रवार को UNGA में भाषण होने के बाद यह अटकलें लगने लगी है कि इमरान खान की यह सरकार चंद दिनों की मेहमान है। पाकिस्‍तानी आर्मी इमरान खान के रवैए से नाखुश है। उसका मानना है कि कश्‍मीर मुद्दे को जिस तरीके से उठाना चाहिए था, उसे ठीक तरीके से नहीं उठाया गया। पूरे मामले में इमरान खान ने अपरिपक्‍वता दिखाई है। इमरान खान ने संयुक्‍त राष्‍ट्र जनरल असेंबली में पूरा झूठा पुलिंदा पेश करने के लिए सभी सीमाएं लांघ गए और भारत के ऊपर अनाप-शनाप आरोप लगाए। यहां तक कि अपने भाषण में दुनिया में आतंकवाद फैलाने में अमेरिका को भी लपेट लिया और कहा कि विश्‍व में आतंकवाद फैलाने के लिए अमेरिका ने फंडिंग की।    

इमरान खान ने आतंकियो को प्रशिक्षित करना कबूला  

न्‍यूयार्क में एक टॉक के दौरान इमरान खान ने कबूला था कि पाकिस्‍तानी फौज और उनके मुल्‍क की जासूसी एजेंसी ISI दोनों ने अल कायदा एवं अन्य आतंकी समूहों को अफगानिस्तान में लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया था। यही नहीं, पाकिस्‍तानी आर्मी और आईएसआई दोनों के संबंध अल कायदा एवं अन्य आतंकी समूहों से थे। इमरान खान के इस बयान से पाकिस्‍तानी आर्मी खासी नाराज है। इमरान खान ने इस मौके पर राजनीतिक अपरिपक्‍वता दिखाई और इससे पाकिस्‍तान की पूरी दुनिया में खासी बदनामी हुई।

पाकिस्‍तानी आर्मी ने इमरान से किया किनारा

इमरान खान के लिए सबसे बड़ी मुश्किल पाकिस्‍तानी आर्मी का साथ छोड़ देना है। आर्मी के प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने इमरान खान से किनारा कर लिया है। ऐसे में पाकिस्‍तान में यह चर्चा है कि पाकिस्‍तानी आर्मी माइनस प्‍लस वन प्‍लान के फामूर्ले पर काम रही है। इमरान खान का तख्‍ता पलट हो सकता है। इसके तहत विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को नया प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है।

पाकिस्‍तानी अर्थव्‍यवस्‍था का बुरा हाल

पाकिस्‍तानी अर्थव्‍यवस्‍था की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। संयुक्‍त राष्‍ट्र ने भी पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर सवाल उठाए हैं। पाकिस्‍तान का राजकोषीय घाटा 8.5 फीसदी हो चुका है, जो बदतर अर्थव्‍यवस्‍था का दर्शाता है और पाकिस्‍तान ने हद से ज्‍यादा लोन ले रखा है, जिसको चुका पाना पाकिस्‍तान के लिए मुश्किल साबित हो सकता है। इमरान खान अर्थव्‍यवस्‍था को सुधारने में नाकाम रहे हैं। ऊपर पाकिस्‍तान के ऊपर आतंकी संगठनों का सहयोग करने के लिए उसकी फंडिंग पर प्रतिबंध भी लग सकता है, जिससे स्थितियां और बदतर हो सकती हैं।

पाकिस्‍तान के वरिष्‍ठ पत्रकारों का मानना है कि इमरान खान के लिए आने वाले दो महीने बेहद कठिन साबित होने वाले हैं, जहां पर उन्‍हें अपनी सरकार को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। उनका भी ये मामना है कि देश की घरेलू समस्‍याओं से भटकाने के लिए इमरान खान बार-बार कश्‍मीर का नाम ले रहे हैं। अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी पाकिस्‍तान को ज्‍यादा सहयोग नहीं मिला है। यहां तक कि मुस्लिम देशों ने भी पाकिस्‍तान से किनारा कर लिया है। मुस्लिम देशों ने ही पाकिस्‍तान को सलाह दी है कि अपने भाषण में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को ज्‍यादा टारेगट नहीं करें।

इमरान की पार्टी की रद हो सकती है मान्‍यता

पाकिस्‍तान के वरिष्‍ठ पत्रकार हामिद मीर का कहना है कि देश की खराब आर्थिक हालत और घरेलू समस्‍याओं से भटकाने के लिए बार-बार कश्‍मीर का नाम ले रहे हैं। हामिद मीर ने बताया कि पाकिस्‍तान का चुनाव आयोग संदिग्‍ध चंदे को लेकर इमरान खान की पार्टी पाकिस्‍तान तहरीके इंसाफ की मान्‍यता को रद्द कर सकता है।

बीएनपी सरकार से ले सकती है समर्थन वापस

इमरान खान पाकिस्‍तान में ब्‍लूचिस्‍तान नेशनल पार्टी के सहयोग से सरकार बनाई है। यह पार्टी ब्‍लूचिस्‍तान में लापता 500 लोगों की रिहाई का दबाव बना रही है। ऐसा नहीं कर पाने पर ब्‍लूचिस्‍तान नेशनल पार्टी सरकार से समर्थन वापस ले सकती है। इस पार्टी के मुखिया मौलाना फजुलर रहमान ने अक्‍टूबर में पाकिस्‍तान में मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसके लिए उन्‍होंने जेल में बंद नवाब शरीफ से भी समर्थन मांगा है। 

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